कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय।
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यही वजह है कि कांग्रेस का एक धड़़ा गठबंधन का विरोध कर रहा है। इन नेताओं का तर्क है कि मन मुताबिक सीटें नहीं मिलने पर उपचुनाव से किनारा करना चाहिए। ऐसे में कांग्रेस के नेता उपचुनाव में गठबंधन पर कभी हां तो कभी ना कह रहे हैं। वे भाजपा को हराने की वकालत करते हैं, लेकिन गठबंधन कायम रहेगा या नहीं, यह मसला शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ते हैं। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सोमवार शाम स्पष्ट किया कि उपचुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया है, लेकिन सिर्फ दो सीटें नाकाफी हैं। प्रदेश के सभी नेताओं से मशविरा करके वस्तुस्थिति के बारे में शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है। मंगलवार दोपहर तक स्थिति साफ हो जाएगी। शीर्ष नेतृत्व से मिले निर्देश के तहत ही आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। भाजपा को हराना जरूरी है। इसके लिए जरूरत पड़ी तो कुर्बानी भी देने को तैयार हैं।
राहुल गांधी, नेता विपक्ष, लोकसभा
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सपा-कांग्रेस के बीच लोकसभा चुनाव में गठबंधन हुआ, लेकिन हरियाणा, जम्मू कश्मीर के बाद अब मुंबई में यह कायम नहीं है। ऐसे में दोनों पार्टी के नेता दबी जुबान से एक-दूसरे को खुद के लिए सियासी तौर पर खतरा बताने में पीछे नहीं रहते हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अपने पुनर्जन्म के लिए संघर्ष कर रही है। 2027 का विधानसभा चुनाव उसके लिए बड़ा मौका है। गठबंधन के तहत सपा ने टिकट देने में हाथ दबा दिया तो वह यह मौका खो देगी। लेकिन उसे यह भी भय सता रहा है कि यदि गठबंधन तोड़ने की पहल उसकी तरफ से हुई तो यही बात सपा जनता के बीच प्रचारित करेगी। ऐसे में भाजपा के विरोधी खेमे में कांग्रेस खलनायक साबित होगी। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस के नेता न चाहते हुए भी गठबंधन का मामला शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ने की बात कह रहे हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति समाजवादी पार्टी की भी है। वह भी खुले तौर पर गठबंधन से इनकार इसलिए नहीं कर रही है कि भविष्य में भाजपा को बढ़त मिली तो कांग्रेस उसे जिम्मेदार ठहराएगी।