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यूपी: प्रदेश के साथ कई पड़ोसी राज्यों में आलू की बंपर पैदावार ने गिराई कीमत, किसानों को लागत से कम मिल रहा भाव

Sun, 07 Dec 2025 10:33 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Potato price: यूपी में इस बार नई आलू की फसल की बंपर पैदावार हुई है। प्रदेश के साथ कई राज्यों में अच्छी फसल होने से भाव औसत से नीचे चल रहे हैं। 
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प्रदेश में आलू का उत्पादन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में भरपूर उत्पादन और पड़ोसी राज्यों से घटी मांग ने नए आलू का भाव गिरा गया है। बाजार में थोक में करीब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इससे किसानों की लागत निकलनी मुश्किल हो गई है। यही नहीं कोल्ड स्टोर में अभी पुराना आलू भी है। इससे फिलहाल दाम बढ़ने के आसार कम हैं। हालांकि, उद्यान विभाग ने सभी जिला उद्यान अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सोमवार को कोल्ड स्टोर का निरीक्षण कर आलू की उपलब्धता की स्थिति बताएं।

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प्रदेश में वर्ष 2024-25 में करीब 245 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा हुआ था। इसमें से 2207 शीतगृहों में करीब 150 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ। इस वर्ष यूपी के साथ ही पंजाब, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश में भी आलू की बंपर पैदावार हुई है। इससे यूपी से पश्चिम बंगाल, आसाम और नेपाल भेजा जाने वाला आलू इस बार बहुत कम जा पाया है।

ऐसे ही आगरा से इस वर्ष पाकिस्तान भी आलू निर्यात नहीं हुआ। शीतगृहों में भी बड़ी मात्रा में आलू अभी बचा है। आमतौर पर उद्यान विभाग 31 अक्तूबर तक स्टोर खाली करने का निर्देश देता है, लेकिन इस वर्ष 30 नवंबर तक का समय दिया गया। फिर भी आगरा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, कन्नौज आदि जिलों में करीब 10 फीसदी भंडारित आलू बचा है। इस बीच नया आलू भी बाजार में आ गया है। पुराने आलू के बचे रहने और नए आलू के बाजार में आ जाने से भाव गिर गया है। रविवार को फर्रुखाबाद में सफेद आलू का थोक भाव 900 रुपये प्रति क्विंटल रहा। हाथरस में 840, छिबरामऊ में 940, कन्नौज में 950 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

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लागत निकालना हुआ मुश्किल

आलू उत्पादन। - फोटो : ramban news
नवंबर 2024 में सफेद आलू औसतन 2122 रुपये प्रति क्विंटल बिका था जबकि नवंबर 2025 में ये 1274 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। अप्रैल-मई 2025 में थोक में सफेद आलू का भाव करीब 1157 से 1173 रुपये प्रति क्विंटल था। जिन किसानों ने आलू शीतगृह में रखा था उन्हें 250 रुपये शीतगृह भाड़ा, 100 रुपये का बोरा और पल्लेदारी व खेत से स्टोर तक पहुंचाने में करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल खर्च करने पड़े। इस तरह शीतगृह में रखे आलू की कीमत करीब 1500 रुपये से अधिक पहुंच गई। दाम गिरने से किसानों की लागत निकलनी मुश्किल हो गई।
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किसानों का दर्द

जिन किसानों ने आलू बीज खरीद कर बुवाई की है उन्हें दोहरा घाटा हो रहा है। बुवाई के वक्त बीज करीब ढाई से तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल था। बुवाई, जुताई, सिंचाई और फिर खोदाई के बाद शीतगृह तक पहुंचने में खर्च अलग हुआ। अब हजार रुपये प्रति क्विंटल से कम में बेचना मजबूरी है। - अरुण सिंह, प्रगतिशील किसान फिरोजाबाद

पूर्वांचल में आलू प्रसंस्कण इकाइयां नहीं हैं। सिर्फ खाने में आलू की खपत होती है। यदि प्रसंस्करण इकाइयां लग जाए तो आलू ही नहीं टमाटर, शकरकंद की खेती बढ़ेगी और किसानों को फायदा मिलेगा। उद्यान विभाग को खपत के हिसाब से रणनीति बनानी चाहिए।- चंद्रशेखर यादव, प्रगतिशील किसान, जौनपुर

दिए गए हैं निर्देश 
प्रदेश में पुराने आलू की उपलब्धता जांचने के लिए सभी जिला उद्यान अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। जिला प्रशासन के साथ मिलकर ये सोमवार को जानकारी जुटाएंगे कि कितना पुराना आलू अभी बचा है। उसी हिसाब से आगे की रणनीति बनाई जाएगी। - डॉ. राजीव वर्मा, कार्यवाहक उप निदेशक (आलू)
 
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