आवास विकास परिषद के सचिव नीरज शुक्ला ने बताया कि अभी तक 26 वर्ष पुराने शासनादेशों के आधार पर ही संपत्तियों का मूल्यांकन तय किया जा रहा था, जिसमें 12 से 15 प्रतिशत तक ब्याज दर, 15 प्रतिशत कंटीजेंसी चार्ज और 10 से 15 प्रतिशत ओवरहेड चार्ज शामिल थे। इससे संपत्तियों के दाम बढ़ने की वजह से खरीदार नहीं मिल रहे थे। अब नई गणना नीति शासन से जारी की गई है। जिसमें कार्नर, पार्क फेसिंग या 18 मीटर अथवा उससे अधिक चौड़ी सड़क पर स्थित संपत्तियों पर लगने वाले अतिरिक्त चार्ज भी घटा दिए गए हैं। अब प्रत्येक के लिए पांच प्रतिशत और तीनों सुविधाओं के होने पर 20 प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज ही लिया जाएगा। संपत्तियों के पूर्ण भुगतान पर छूट का प्रावधान भी किया गया है। इसके अनुसार 45 दिन में एकमुश्त भुगतान पर छह प्रतिशत, 60 दिन में भुगतान पर पांच प्रतिशत और 90 दिन में भुगतान पर चार प्रतिशत की छूट मिलेगी।
नई गणना नीति के अनुसार जो संपत्तियां तीन वर्ष पुरानी हैं और पांच बार विज्ञापन निकालने के बाद भी नहीं बिक पा रही हैं उन्हें सेल जरिए से बेचने पर 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकेगी। इसे इस तरह समझा जा सकता है यदि कोई संपत्ति 50 लाख रुपये की थी और बिक्री न होने के कारण यह बढ़कर 55 लाख रुपये हो गई है तो बढ़ी हुई राशि यानी अतिरिक्त पांच लाख रुपये पर 25 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी।
नई गणना नीति लागू होने से जमीन, मकान और फ्लैट के दाम नई योजनाओं में कम होंगे। पुरानी योजनाओं में जो संपत्तियां नहीं बिक रही हैं उनकी कीमतें भी नई नीति के तहत कम हो जाएंगे। ऐसे में लोगों का घर बनाना आसान होगा।- बलकार सिंह, आवास आयुक्त व सचिव आवास विभाग