प्रदेश सरकार ने बजट आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है। अब बजट आदेशों की हार्ड कॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। डिजिटल हस्ताक्षरित आदेश सीधे प्रणाली में अपडेट होंगे, जिससे भुगतान और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा तक डिजिटल हस्ताक्षर पंजीकरण पूरा करना होगा।
प्रदेश सरकार ने बजट आवंटन और कोषागार प्रक्रिया को तेज और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने आदेश जारी कर बजट आवंटन आदेशों की हार्ड कॉपी कोषागार में जमा करने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। अब डिजिटल हस्ताक्षरित कंप्यूटर जनित बजट आवंटन आदेश जारी होते ही स्वतः कोषागार प्रणाली में लोड और अपडेट हो जाएंगे।
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वित्त विभाग की सचिव संदीप कौर द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, अभी तक कई विभागों में डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) की व्यवस्था होने के बावजूद कोषागार हार्ड कॉपी मिलने के बाद ही बजट आवंटन अपडेट कर रहे थे, जिससे भुगतान और योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी हो रही थी।
शासनादेश में स्पष्ट किया है कि अब ‘बजट एलॉट’ एप्लीकेशन में बिना डिजिटल हस्ताक्षर के कोई बजट आवंटन आदेश जनरेट नहीं होगा। जिन विभागों ने अभी तक अपने सुपर यूजर का डीएससी पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें हर हाल में 15 जून 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसा न होने पर संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाएगा।