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यूपी: अगले महीने से राज्यसभा में शून्य हो जाएगी बसपा, राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी खतरे में; जानिए पूरी कहानी

Tue, 22 Sep 2026 07:39 PM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्रा, अमर उजाला लखनऊ

सार

BSP in Rajya Sabha: बसपा की उपस्थिति अब राज्यसभा से शून्य होने जा रही है। पाटी यूपी विधानसभा और लोकसभा में पहले ही शून्य हो चुकी है। 
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बसपा पर मंडराया राष्ट्रीय पार्टी होने का दर्जा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 बहुजन समाज पार्टी की अगले माह लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी हिस्सेदारी शून्य हो जाएगी। पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल अगले माह समाप्त हो रहा है। बसपा के पास इतने विधायक नहीं हैं, जो उसके किसी उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सकें। इन हालात में बसपा राज्यसभा चुनाव में अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारने का फैसला भी ले सकती है।

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बता दें कि बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में भी बसपा की उपस्थिति समाप्त हो चुकी है। राज्यसभा में उनके किसी प्रत्याशी को जाने के लिए कम से कम 37 वोटों की दरकार होगी। इतनी बड़ी संख्या में वोट जुटा पाना फिलहाल बसपा के लिए असंभव है। इन हालात में पार्टी का लोकसभा, राज्यसभा के साथ यूपी की विधानसभा और विधान परिषद में कोई सदस्य नहीं बचेगा।

दरअसल, बीते करीब डेढ़ दशक से बसपा का सियासी सफर संकट भरा रहा है। वर्ष 2019 में बसपा के 10 प्रत्याशी लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे हालांकि तब बसपा ने सपा के साथ गठबंधन किया था। इसके बाद वर्ष 2022 के चुनाव में बसपा के उमाशंकर सिंह बलिया की रसड़ा सीट से जीत हासिल कर पाए थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला था। चुनाव दर चुनाव बसपा का वोट प्रतिशत भी घटने से पार्टी को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है।

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राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी खतरे में

बसपा की स्थापना की कहानी। - फोटो : अमर उजाला
राज्यसभा चुनाव के बाद बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा फिर खतरे में पड़ जाएगा। बसपा की स्थापना वर्ष 1984 में कांशीराम ने की थी। पार्टी को वर्ष 1997 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था। हालांकि चुनाव आयोग ने पिछले साल बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखा था। अब अगले वर्ष होने वाले यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बसपा के राष्ट्रीय पार्टी होने का भविष्य तय कर सकते हैं।
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गठबंधन नहीं होने से मुश्किल

दरअसल बसपा ने वर्ष 2019 के बाद किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं किया है। इसकी वजह से उसका राज्यसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होने की कगार पर है। गठबंधन होने पर उसे सहयोगी दल के वोट मिल सकते थे, जिसके लिए अब देर हो चुकी है।
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