यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं उन्हीं विद्यालयों में होंगी, जहां संबंधित छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। हालांकि इसके लिए शर्त होगी कि परीक्षाएं संबंधित विद्यालयों में अनिवार्य रूप से वायस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कराई जाएं। बीते वर्षों में निजी विद्यालयों में स्वकेंद्र की व्यवस्था नहीं थी और उनके केंद्र दूसरे विद्यालयों में बना दिए गए थे। इसके साथ ही बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों की ओर से परीक्षकों से जुड़े जरूरी प्रपत्र व उनकी सूची सभी जिलों को 18 तक भेजी जा रही है, जिससे उन्हें सभी विद्यालयों में वितरित कराया जा सके।
इस संबंध में 21 जनवरी से शुरू हो रहीं प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए बोर्ड की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि सीसीटीवी की रिकार्डिंग विद्यालयों के प्रधानाचार्य अपने पास सुरक्षित रखेंगे। परीक्षकों के लिए कहा गया है कि वह अपने साथ आधार कार्ड या मान्य पहचान पत्र आवंटित विद्यालय में अवश्य ले जाएं। परीक्षक के पहचान पत्र की प्रति विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिलेख के रूप में अपने पास सुरक्षित रखेंगे। परीक्षकों के नियुक्ति पत्र व उनकी तैनाती की सूची परिषद की वेबसाइट पर विद्यालयों व डीआईओएस के पोर्टल पर भी अपलोड रहेगी। प्रयोगात्मक परीक्षाओं की निगरानी के लिए जिलों में जिलाधिकारियों की ओर से सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जा रहे हैं।
विधानपरिषद सदस्य ने किया स्वागत
लखनऊ शिक्षक खंड से विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी ने प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए स्वकेंद्र व्यवस्था का स्वागत किया है। उनके अनुसार बीते वर्ष परीक्षा में वित्त विहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को हटा दिया गया था। परीक्षक भी कम बनाए गए थे। साथ ही निजी विद्यालयों के प्रयोगात्मक परीक्षा के केंद्र दूसरे विद्यालयों में बनाए गए थे। इससे शिक्षकों, प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों में रोष था। शिक्षा मंत्री व उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद यह व्यवस्था बनाई गई है।