केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान नाराजगी दूर करने और संगठन में तालमेल बैठाने की कोशिश महत्वपूर्ण होगी। नेतृत्व के सामने संदेश साफ है कि चुनावी रणनीति और बड़े नेताओं के दौरों से ही जीत सुनिश्चित नहीं होगी। पदों की बंदरबांट और उपेक्षा की शिकायतों का समाधान किए बिना पार्टी अपने ही असंतुष्टों को चुनावी चुनौती बनने से नहीं रोक पाएगी।