सत्यनारायण का विचारण जारी रहा
पुलिस के अनुसार पूछताछ में परशुराम ने भागे साथी का नाम वीरमपुर निवासी सत्यनारायण बताया। यहीं से सत्यनारायण के खिलाफ मुकदमे की शुरुआत हुई। पुलिस ने परशुराम के साथ सत्यनारायण को भी आरोपी बनाते हुए आबकारी अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की और चार्जशीट दाखिल कर दी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान परशुराम की मौत हो गई। सत्यनारायण का विचारण जारी रहा।
रंजिश में नाम लेने का लगाया आरोप
सत्यनारायण ने अदालत में बयान दिया कि परशुराम से उसकी रंजिश थी। इसी वजह से उसने उसका नाम लिया था जबकि वह शराब नहीं बेचता था। सत्यनारायण के मुताबिक रंजिश के चलते और रुपये नहीं देने पर मड़ियांव पुलिस ने उसे एफआईआर में आरोपी बना दिया।
न मौके से पकड़े गए, न कब्जे से हुई बरामदगी
अदालत ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि सत्यनारायण को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया था। उसके कब्जे से कोई बरामदगी भी नहीं हुई। अभियोजन के दोनों तथ्यात्मक गवाहों ने भी सत्यनारायण के पास से किसी बरामदगी की बात नहीं कही। साथ ही घटना का कोई स्वतंत्र गवाह भी अभियोजन की ओर से पेश नहीं किया गया।
सिर्फ नाम से अपराध सिद्ध नहीं
अदालत ने कहा कि केवल सह अभियुक्त के बताए नाम के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। अभियोजन यह भी साबित नहीं कर सका कि सत्यनारायण ने शराब में यूरिया मिलाई या उसे बेचने का प्रयास किया था। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।