दरअसल, सीबीआई को सूचना मिली थी कि लखनऊ में उत्तर रेलवे और वाराणसी में पूर्वोत्तर रेलवे के 6 रेलकर्मी गति शक्ति प्रोजेक्ट से जुड़े कार्यों के बिल के भुगतान के लिए ठेकेदारों से घूस लेते हैं। दिल्ली की टैंजेंट इंफ्राटेक कंपनी के प्रवीण कुमार सिंह और सिकंदर अली को प्रोजेक्ट के तहत भदोही में कार्य मिला था, जिसके कई बिलों का भुगतान डिप्टी चीफ इंजीनियर विवेक कुशवाहा ने घूस लेकर किया है। कई अन्य रेलकर्मी भी उससे लगातार घूस लेते हैं। प्रवीण ने अपने कर्मचारी जिमी सिंह के जरिये 21 जून और 26 जून को वाराणसी में राकेश रंजन को 2 लाख रुपये घूस की रकम व्हाट्सएप पर संपर्क कर एक क्लब में सौंपी थी।
इसी तरह 28 अप्रैल को अभिषेक गुप्ता ने प्रवीण से 50 हजार रुपये घूस बैंक खाते में ली थी, जो प्रवीण के अकाउंटेंट केशव चौधरी ने जमा की थी। कार्यालय सहायक मनीष भी घूस लेकर बिलों का भुगतान कराता था। प्रवीण की कंपनी का 3 करोड़ रुपये का बिल मंजूरी के लिए एक महिला अधिकारी के पास भेजा गया था, जिसे घूस में हिस्सा देने का वादा किया गया था। मनीष ने 3 जुलाई को प्रवीण को बताया कि डीआरएम ने बिल में वेरिएशन की स्वीकृति दे दी है। इसी तरह लेखा विभाग के कर्मी योगेश गुप्ता, सीनियर क्लर्क सुशील कुमार राय भी कंपनी से नियमित रूप से घूस ले रहे थे। यह जानकारी भी मिली कि 13 जुलाई को प्रवीण ने जिमी से कहा था कि वह सोमवार को लखनऊ जाकर विवेक कुशवाहा को 7 लाख रुपये घूस की रकम सौंप दे।
राजधानी में तैनात गति शक्ति प्रोजेक्ट के डिप्टी चीफ इंजीनियर विवेक कुशवाहा के साथ वाराणसी में तैनात सीनियर डिवीजनल इंजीनियर (कोऑर्डिनेशन) राकेश रंजन, डीआरएम कार्यालय पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी के कार्यालय अधीक्षक मनीष, सीनियर सेक्शन इंजीनियर अभिषेक गुप्ता, लेखा विभाग के कर्मी योगेश गुप्ता, सीनियर क्लर्क सुशील कुमार राय, टैंलेंज इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रवीन कुमार सिंह, जिमी सिंह और टैंलेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड।