बसपा विधायक उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों में बड़ा खुलासा हुआ है। बीते तीन दिन से लखनऊ, मिर्जापुर और सोनभद्र में विधायक के करीबियों के ठिकानों पर छानबीन में खनन के बेनामी पट्टे लेने का पता चला है। खासकर राजधानी के सदर बाजार निवासी इश्तियाक ने सर्वाधिक बेनामी पट्टे लिए थे। उसे पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का करीबी भी बताया जाता है।
अधिकारियों के मुताबिक मिर्जापुर और सोनभद्र में अधिकतर बेनामी पट्टे लिए गए थे। इसके जरिये बड़े पैमाने पर अवैध खनन को भी अंजाम दिया गया। जांच में कई स्थानीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जो पट्टाधारकों से उगाही कर रहे थे।
आयकर विभाग जल्द ही इन अधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस देकर तलब करेगा। वहीं, दूसरी ओर आयकर विभाग ने विधायक, उनके परिजनों, कंपनियों और करीबियों के 100 से ज्यादा बैंक खातों और लॉकर्स को चिह्नित किया है, जिन्हें फ्रीज कराने का निर्देश बैंकों को दिया गया है। छापों में यूपी समेत कई राज्यों में बेशकीमती संपत्तियों की खरीद-फरोख्त करने के सुराग भी मिले हैं।
टैक्स चोरी का आकलन जारी
आयकर विभाग विधायक और उनके करीबियों के ठिकानों पर छानबीन में मिले सबूतों के आधार पर टैक्स चोरी का आकलन कर रहा है। हालांकि बड़े पैमाने पर अघोषित लेन-देन के सामने आने की वजह से इसमें देरी हो रही है। सूत्रों की मानें तो विधायक और उनके करीबियों पर टैक्स चोरी का आकलन होने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर अवैध खनन की कमाई को निवेश करने के मामले में वह बुरी तरह फंस सकते हैं। इंवेस्टिगेशन विंग द्वारा आगे इस प्रकरण को बेनामी संपत्ति निषेध इकाई को ट्रांसफर करने से उनको पाई-पाई का हिसाब देना पड़ेगा।