मामले को पहले मैनेज करने में अफसर जुटे थे। चूंकि मामला सीधे न्यायालय से जुड़ा था इसलिए कार्रवाई शुरू हुई। इसमें पहले केवल एक जेलर को निलंबित किया गया था। अधीक्षक के खिलाफ केवल जांच का हवाला दिया जा रहा था। यहां तक कि उच्चाधिकारी बंदी को रिहा करने में अधीक्षक की किसी तरह की जिम्मेदारी ही नहीं बता रहे थे लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा तब जांच करवाकर रिपोर्ट शासन भेजी गई। इसके बाद अधीक्षक पर कार्रवाई हुई।
एफआईआर जेल अधीक्षक, जेलर व अन्य जेल अधिकारी व कर्मचारियों पर दर्ज की गई है। केस में रवि काना को आरोपी नहीं बनाया गया है। एसपी बांदा पलाश बंसल का कहना है कि रिहाई लिखापढ़ी में अफसराें ने की। इसलिए अभी रवि को आरोपी नहीं बनाया गया है। विवेचना में अगर अफसरों व बंदी के बीच सांठगांठ के साक्ष्य मिलते हैं तो उसको भी आरोपी बनाया जाएगा और एफआईआर में धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी।