यूपी में बिजली व्यवस्था।
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पूर्वांचल और दक्षिणांचल को निजी हाथों में देने के मसले पर विभिन्न श्रम संघ एक मंच पर आ गए हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में निजीकरण का हर हाल में विरोध करने का फैसला लिया गया। उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों के श्रम संघों के शीर्ष पदाधिकारियों ने मांग की है कि जनहित और बिजली कार्मिकों के हित में निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए। यह भी संकल्प लिया गया कि निजीकरण के विरोध में होने वाले आंदोलन का समर्थन करेंगे। संयुक्त बैठक की अध्यक्षता जेएन तिवारी ने की। इस दौरान केएमएस मगन, विजय विद्रोही, चन्द्रशेखर, कमल अग्रवाल, प्रेमनाथ राय, अफीफ सिद्दीकी, नरेंद्र प्रताप सिंह, विजय कुमार बन्धु, प्रेमचंद्र आदि मौजूद रहे।
पावर काॅर्पोरेशन के फैसले को दी चुनौती, आयोग में विरोध प्रस्ताव दाखिल
उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन निदेशक मंडल की ओर से विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 131(4) के तहत पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल को पीपीपी मॉडल में देने और पांच नई कंपनियां बनाने के फैसले को चुनौती दी है। इसके लिए विद्युत नियामक आयोग में विरोध प्रस्ताव दाखिल कर दिया है।
आयोग को पत्र भेजकर बताया कि कॉरपोरेशन की ओर से धारा 131(4 )का प्रयोग करते हुए पहले से ही चार कंपनियां बना चुका है। इतना ही नहीं दक्षिणांचल व पूर्वांचल ने वर्ष 2025-26 का एआरआर दाखिल कर दिया है। ऐसे में इनका निजीकरण नहीं किया जा सकता है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने शुक्रवार को विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर पावर कॉरपोरेशन के आदेश को चुनौती दी।