समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां ने अपनी कैद के 23 माह जिला कारागार की गिरदा बैरक में गुजारे। जेल सूत्रों के अनुसार आजम खां नियम से सुबह 4 बजे जल्दी उठते थे। इसके बाद अपनी दिनचर्या का पालन करते थे। जेल में अपनी कैद की इस अवधि में उन्होंने कभी किसी भी तरह की स्पेशल डिमांड नहीं की। हमेशा जेल के नियमों का पालन करते रहे। जेलकर्मियों के अनुसार आजम खां का व्यवहार बेहद सरल रहा। सोमवार को जब जेल अधीक्षक डॉ एस के सिंह ने उन्हें रिहाई की खबर दी तब भी आजम खां के चेहरे पर गंभीर भाव रहे। उन्होंने चलते समय जेलकर्मियों से मिलकर उनका आभार जताया।
जेल अधीक्षक डॉ एस के सिंह ने बताया कि वह 28 जून 2021 में जिला कारागार सीतापुर में तैनात हुए। तैनाती के समय पता चला कि आजम खां 27 फरवरी 2020 से जिला कारागार में हैं। इसके बाद 20 मई 2022 को आजम खां जेल से रिहा हो गए थे। उस समय भी उनका स्वभाव बेहद गंभीर रहा। बताया कि जब अक्तूबर 2023 को दोबारा आए तो उन्हें गिरदा बैरक में रखा गया। सूत्रों के अनुसार यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद खास बैरक है। आजम खां इस बैरक में कुछ धार्मिक किताबें पढ़कर अपना समय व्यतीत करते रहे। वह सामान्य कैदियों की तरह ही आचरण करते रहे। कभी कोई वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मांगा।
2017 में इसी बैरक में रुका था मुख्तारआजम खां को जिस बैरक में रखा गया था, उसी बैरक में वर्ष 2017 में तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी 16 घंटे रुका था। उन्हें 15 मई 2017 को बांदा जेल से विधानसभा सत्र के दौरान लाया गया था। इस दौरान मुख्तार अंसारी रात में रुके थे।