यह सामान आरोपियों के पास मिला
पकड़े गए आरोपियों के पास से 12 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप, मोबाइल व लैपटॉप से मिले 129 लोगों के आयुष्मान कार्ड से संबंधित डेटा, 70 लोग के अपात्र के आयुष्मान कार्ड के स्क्रीनशॉट, 22 डेबिट कार्ड, आठ पैनकार्ड, 2 आईडी कार्ड, 10 चेकबुक, 5 पासबुक, दो मतदाता पहचान पत्र, दो डीएल, एक स्कैनर, चार मोहर, दो क्यूआर कोड, एक सीपीयू, एक कलर प्रिंटर, तीन सिमकार्ड, एक कार और 60370 रुपये मिले हैं।
ओटीपी बायपास कर बनवाते थे कार्ड
पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह लोग पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में ओटीपी बायपास कर अपात्र लोगों को जोड़ता था। इसके बाद ISA और SHA (State Health Agency) स्तर पर सेटिंग के जरिए आयुष्मान कार्ड अप्रूव कराये जाते थे। पकड़े गए आरोपी चंद्रभान ने बताया कि उसने सौैरभ, सुजीत और विश्वजीत को 22 लाख रुपये कार्ड को अप्रूव करने के लिए दिए थे।
6 हजार रुपये में बनता था फर्जी कार्ड
गैंग के मास्टरमाइंड पकड़ा गया आरोपी चंद्रभान वर्मा है। उसने पूछताछ में बताया कि वह प्रति कार्ड 6 हजार रुपये लेता था। दो हजार रुपये फैमिली आईडी में अपात्र व्यक्ति को जुड़वाने में 1000 से 1500 रुपये ISA में कार्ड अप्रूवल के लिए, SHA स्तर पर अप्रूवल के लिए 4500 से 5000 रुपये तक खर्च होते थे।
पूछताछ में पता चला कि कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट लखनऊ में रंजीत सिंह, आयुष्मान मित्र के तौर पर कार्यरत है। वह अस्पताल के ही कंप्यूटर ऑपरेटर फर्जी कार्डों में जिले का मिसमैच ठीक करता था। इसके बाद इन्हीं कार्डों से अलग-अलग अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराकर अवैध कमाई की जाती थी। एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर गैंग से जुड़े अन्य आरोपियों के बारे में पता लगाया जा रहा है।