सूत्रों के मुताबिक नई गाइडलाइन में यह प्रावधान किया जा रहा है कि आयुर्वेद परास्नातक डिग्रीधारी डॉक्टरों को छह माह का एलोपैथी चिकित्सालयों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। जहां वे आपात स्थिति में प्रबंधन, एलोपैथी से होने वाली सर्जरी में बरती जाने वाली सावधानी आदि से वाकिफ हो सकेंगे।
क्यों तैयार की जा रही गाइडलाइन
भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (सीसीआईएम) ने शल्य और शल्य के स्नातकोत्तर छात्रों को विशिष्ट शल्य चिकित्सा करने की अनुमति देने के लिए भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक शिक्षा) विनियम, 2016 में संशोधन किया है। इसके तहत शल्य तंत्र (सामान्य शल्य चिकित्सा) और शल्यक (आंख, नाक, गला, सिर और दंत चिकित्सा) में स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र इस विधा में सर्जरी कर सकेंगे। इसके बाद 2020 में इसमें संशोधन किया गया। ऐसे में अब सभी राज्यों को बारी- बारी से संशोधन के मुताबिक सर्जरी के लिए अपने राज्यों में अनुमति देनी है।
स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक डाक्टरों को स्वतंत्र रूप से सर्जरी करने संबंधी नियमावली को आंध्र प्रदेश में अनुमोदित कर दी गई है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
नए सिरे से नियमावली तैयार कराई जा रही है। अन्य राज्यों में शुरू की गई व्यवस्था का भी आकलन किया जा रहे हैं। आयुर्वेद में सर्जरी पढ़ाई जाती है। उन्हें सर्जरी की अनुमति मिलने से मरीजों को फायदा होगा। आयुर्वेद अस्पतालों को भी उच्चीकृत किया जाएगा। वहां सभी तरह के संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।- रंजन कुमार, प्रमुख सचिव आयुष ।