कोरोना की दूसरी लहर में पिछले दिनों जगदीशपुर के सिधियावा व हारीमऊ गांव में 30 से अधिक लोगों की मौत होने से ग्रामीण खौफजदा हो गए थे। मौतों की सूचना सार्वजनिक होने के बाद जिला प्रशासन के हरकत आने के बाद स्वास्थ्य टीमें गांव में पहुंचने लगी। पूरे गांव को सैनिटाइज करने के साथ ही लक्षण वाले मरीजों की तलाश शुरू कर दी गई। कई परिवार के कमाऊ व्यक्ति की मौत होने से उन घरों की ईंद फीकी पड़ गई है। ग्रामीण अभी गांव में और साफ-सफाई के साथ सैनिटासइजेशन कराने की जरूरत बता रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर में लगातार बढ़ रहे संक्रमित मरीजों की संख्या और मौत के आंकड़ों से लोग डरे हुए हैं। क्षेत्र का कोई भी गांव ऐसा नहीं होगा जहां सभी घरों में किसी न किसी को बुखार, जुखाम व खांसी नहीं हो। बावजूद इसके लोग कोरोना की जांच कराने से कतरा रहे हैं। कोरोना जांच वही करा रहे हैं जिनकी अचानक सांस फूलने लग रही है या फिर उनका ऑक्सीजन लेबल कम हो रहा है। सरकारी पोर्टल पर तो वहीं आंकड़ा फीड हो रहा है जिनकी कोरोना जांच होने के बाद एल-2 व एल-3 में इलाज के दौरान मौत हो रही है। इन दिनों चल रहे बुखार में लोगों का प्लेटनेट तेजी से घट रहा है।
सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद होने से ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के लोग छोला छाप चिकित्सक व कुछ निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। बिना जांच के हो रही मौतों में तकरीबन सभी लोग बुखार, जुखाम व खांसी से पीड़ित बताए जा रहे हैं। इसी तरह पिछले दिनों जगदीशपुर के सिधियावा व हारीमऊ गांव में एक सप्ताह के भीतर करीब 30 लोगों की मौत हो गई। इन गांवों में एक के बाद एक की मौत होने से ग्रामीण खौफ में जीने लगे थे। इनमें से किसी की भी कोरोना की जांच नहीं हुई थी। मरने वालों में सभी लोग बुखार आदि से पीड़ित थे।
अमर उजाला की टीम पहुंची गांव
अमर उजाला टीम गांव पहुंची तो लोग ने गत दिनों के हालात बताए। कई ग्रामीणों ने बताया कि कई लोगों की मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से घरों का सर्वे किया गया। इस दौरान बुखार, सर्दी जुखाम आदि से पीड़ित मरीजों को दवाएं दीं गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने गांव में सैनिटाइजेशन कराने का दावा किया गया। उधर ग्रामीणों का कहना है कि सभी घरों को सैनिटाइज नहीं कराया जा रहा है।
सभी को कराना चाहिए कोरोना जांच
हारीमऊ के धर्मचंद्र कौशल ने बताया कि गांव के ऐसे सभी लोगों को कोरोना जांच की जानी चाहिए जिन्हें बुखार आ रहा है। गत दिनों गांव आई स्वास्थ्य टीम से सिर्फ आठ लोगों ने ही जांच कराई। उनमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। बाकी गांव के लोग जांच कराने को तैयार नहीं हुए। टीम दो दिन उन घरों पर गई लेकिन उन्हें बिना जांच के वापस जाना पड़ा।
कमाऊ की मौत से परिवार परेशान
हारीमऊ निवासी अफरोज कहते हैं कि उनके पड़ोसी तौफीक अहमद (37) की मौत होने से परिवार बेसहारा हो गया। तौफीक गांव के अब्बास के यहां सिलाई का काम कर परिवार का भरण पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार का खर्च चलाने वाला कोई नहीं बचा है। ईंद पर मां राबिया बेगम, पत्नी फातिमा, बहन सुगरा, बेटी निदा व फिजा तौफीक को यादकर बहुत दुखी थे।
हर जरुरत मंद को मिले ऑक्सीजन
सिधियावा निवासी मेराज अहमद कहते हैं कि उनके गांव की हालत तो अब ठीक है। स्वास्थ्य टीमें लगातार गांव आ रही हैं। बुखार, जुखाम, सर्दी से पीड़ित लोगों को दवा किट भी दी जा रही है। बहुत से ऐसे मरीज हैं जिन्हें पहले से सांस की बीमारी है और वह अपने घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखे हैं। जरूरत पड़ने पर वे नियमित रूप से घर पर ही ऑक्सीजन घर ही लेते रहे हैं। इस समय लोगों को व्यक्तिगत ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। उन्होंने सरकार से ऐसे लोगों को भी ऑक्सीजन मुहैया कराने की बात कही है।
स्वास्थ्य टीमें लगातार कर रहीं सर्वे
जगदीशपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. एमपी तिवारी ने कहा कि उक्त दोनों गांव के साथ ही ब्लॉक क्षेत्र के सभी गांवों में उनकी टीम नियमित रुप से भ्रमण कर रही हैं। घर-घर सर्वे का काम भी नियमित रुप से चल रहा है। बुखार आदि से पीड़ित लोगों को तत्काल दवा मुहैया कराई जा रही है। लक्षण वाले लोगों की सैंपलिंग भी कराई जा रही है। पूरे ब्लॉक में संक्रमित मरीजों के मिलने की संख्या पहले से कम हुई है। सिधियावा व हारीमऊ गांव की स्थिति अब ठीक है। समय-समय पर चिकित्सकों की भी टीम गांव में भ्रमण कर रही है। गांव की नालियों में दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है। कहा कि अस्पताल से सिधियावा की दूरी तीन किलोमीटर व हारीमऊ की दूरी पांच किलोमीटर है।