फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी : जेल में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर हमला आकस्मिक घटना....राजनीतिक साजिश नहीं; पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Sat, 06 Dec 2025 08:44 AM IST
आकाश द्विवेदी अनुराग सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

जेल अस्पताल में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर हुआ हमला जांच में आकस्मिक पाया गया और किसी राजनीतिक साजिश के सबूत नहीं मिले। डीआईजी की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने मामला समाप्त करते हुए इसे बंदी और पूर्व मंत्री के बीच कहासुनी से उपजा विवाद बताया।
विज्ञापन
गायत्री प्रसाद प्रजापति। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लखनऊ में जेल अस्पताल में पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति पर हमले के मामले में जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में अफसर ने राजनीतिक साजिश के तहत जेल में पूर्व मंत्री पर हमला किए जाने के आरोप को निराधार बताया है। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में लिखा है कि पड़ताल के दौरान मंत्री पर साजिशन हमला और किसी तरह के षड्यंत्र रचे जाने के सबूत नहीं मिले हैं।

डीआईजी ने हमले की जांच की 

लखनऊ परिक्षेत्र के जेल डीआईजी डॉ. रामधनी ने जेल अस्पताल में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर हुए हमले की जांच की। जिला जेल पहुंचकर डीआईजी ने आरोपी बंदी विश्वास, ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट, चश्मदीद जेलकर्मी और बंदियों के बयान दर्ज किए। जेल अस्पताल के कैमरों की फुटेज भी खंगाली। घटना के बाद अस्पताल में मंत्री को मुहैया कराए गए इलाज से जुड़े दस्तावेज भी देखे।

विज्ञापन


जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 30 सितंबर की शाम करीब छह बजे जेल अस्पताल की ओपीडी में दवा वितरण के दौरान आरोपी बंदी विश्वास की गायत्री से कहासुनी हो गई थी। पूर्व मंत्री के अपशब्द कहने पर आरोपी बंदी विश्वास ने आक्रोशित होकर आलमारी की लोहे की पटरी से उनके सिर पर वार कर दिया था। 

सिर में दर्द की शिकायत पर गायत्री को एहतियात के तौर पर ट्रामा सेंटर भेजा गया था। जेल प्रशासन ने आरोपी बंदी के खिलाफ गोसाईंगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस भी जल्द ही मामले में आरोप पत्र दाखिल करेगी। 

अखिलेश यादव ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे

पूर्व मुख्यमंत्री व सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। वहीं, पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने भी एक अक्तूबर को शिकायती पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की थी। प्रकरण का संज्ञान लेते हुए शासन ने जांच के आदेश दिए थे। 

विज्ञापन


जांच रिपोर्ट के अनुसार यह घटना पूर्व नियोजित नहीं बल्कि एक आकस्मिक थी। रेंज डीआईजी की रिपोर्ट के आधार पर कारागार मुख्यालय ने प्रकरण की जांच को समाप्त करने का निर्णय लिया है। मेरठ परिक्षेत्र के जेल डीआईजी आईपीएस सुभाष चंद्र शाक्य ने मामले की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी है।
विज्ञापन


 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें