उन्होंने कहा कि पीडीए का नाम सुनकर आप चिढ़ जाते हैं। निजीकरण को बढ़ावा देकर उनके आरक्षण को खत्म करने की तैयारी है। नगर विकास मंत्री ने कहा कि स्वर्ग आ गया है। पहले पता होता तो अपने गांव के लोगों को महाकुंभ की जगह मंत्री के पास ही भेज देते। आप लोग पीडीए के बल पर जीतकर आते हैं और बाद में उसे ही गाली देते हैं। पीडीए से डरिए नहीं। सारे उपचुनाव जीत कर इठला रहे हैं। चुनाव में दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन के प्रभाव से चुनाव लड़ा जाएगा तो पार्टी और आम कार्यकर्ता कहां जाएगा। जिस तरह भय के वातावरण में उपचुनाव हुआ, उससे तो किसी दिन कोई तानाशाह आएगा और हमें कान पकड़कर बाहर कर देगा।
मस्जिदों में मंदिर तलाश रही सरकार
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को संविधान ने तमाम अधिकार दिए हैं। कितने मदरसों को बंद कराया जा चुका है। सरकार की नीयत मस्जिदों में मंदिर खोजने की है। कलेक्टर किसी जगह नया मंदिर या मस्जिद बनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। अगर संविधान की मान्यता नहीं रहेगी तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। हम और आप फिर यहां नहीं बैठेंगे और तानाशाही आ जाएगी। वहीं नमागि गंगे परियोजना पर कहा कि वर्तमान में 225 नाले नदी में मिल रहे हैं। गंगा हमारी जीवनधारा है। संस्कृति का आधार है। मेरठ के गांधी आश्रम की भूमि का प्रकरण भी उठाते हुए कहा कि कुछ लोग उसे बेचना चाहते हैं। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।
अब तो स्थायी डीजीपी बना दीजिए
नेता प्रतिपक्ष ने एनसीआरबी के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि प्रदेश में अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसे गंभीरता से लेना चाहिए। पुलिस का व्यवहार कैसा होता है, आप अच्छी तरीके से जानते हैं। थाने में मुकदमा दर्ज करने और विवेचना की अलग ब्रांच होनी चाहिए। कहा कि अब तो डीजीपी का चयन कर लीजिए। फिलहा जो हैं, उन्हें ही अपने नियमों से स्थायी कर दीजिए। डीजीपी पर दबाव नहीं होगा तो वह निष्पक्ष होकर काम करेगा।