समाजवादी पार्टी ने विधानसभा में बृहस्पतिवार को छुट्टा पशुओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। सपा ने निराश्रित गौवंश की समस्या समाधान के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन कर मंत्री बनाने की मांग की। पशुधन मंत्री ने दावा किया कि कुछ समय बाद समस्या का समाधान हो जाएगा। छुट्टा पशु खेत और सड़क पर नजर नहीं आएंगे। सरकार के जवाब से असंतुष्ट सपा विधायकों ने सदन से बर्हिगमन भी किया।
सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय ने कहा कि छुट्टा पशुओं से परेशान किसान खेती छोड़कर रोजगार के लिए पड़ोसी राज्यों में पलायन कर रहे है। किसानों को अपनी फसल को बचाने के लिए रात-रात भर छुट्टा पशुओं से युद्ध लड़ना पड़ रहा है। छुट्टा पशुओं के कारण अब तक 278 दुर्घटनाएं हुई है और 109 लोगों की मौत हुई है।
इस पर पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश में 6529 गौ आश्रय स्थलों में 10,76,053 गायों को रखा गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में भी निराश्रित गौवंश की समस्या समाधान के लिए 750 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। वहीं विधान परिषद में उन्होंने कहा कि सड़कों और खेतों पर शीघ्र ही निराश्रित गोवंश नहीं दिखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के लोग जब तक गाय दूध देती है तो उसे पालते हैं लेकिन दूध देना बंद करने के बाद उसे सड़क पर छोड़ देते है। हम सपा के लोगों की तरह नहीं गाय हमारे लिए राष्ट्र की माता है।
दोहरी राजनीति कर रही सपा
बलरामपुर से भाजपा विधायक पलटूराम ने राज्यपाल के अभिभाषण का समर्थन करते हुए कहा कि सपा सदन में जातीय जनगणना के नाम पर दोहरी राजनीति कर रही है। 1995 में दलित की बेटी मायावती को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए सपा ने जो किया वह किसी से छिपा नहीं है। वहीं भाजपा के समर्थन से मायावती सीएम बनीं थीं। उन्होंने कहा कि सपा पिछड़ों के लिए नहीं बल्कि एक परिवार के फायदे के लिए जातीय जनगणना की बात कर रही है।