बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा की है। उन्होंने अपने खिलाफ हुई साजिश में कुछ पार्टी पदाधिकारियों की भूमिका का जिक्र किया। सूत्रों के अनुसार, उनका इशारा दो बड़े पदाधिकारियों की ओर है, जिनसे लंबे समय से तनातनी है।
बसपा में अशोक सिद्धार्थ को लेकर करीब दो साल से नाराजगी थी। उन्हें दो बार पार्टी से निष्कासित किया गया। महाराष्ट्र चुनाव में टिकट वितरण में गड़बड़ी और दिल्ली चुनाव में हस्तक्षेप के आरोप लगे। उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप था। हालिया कार्रवाई में उन पर यूपी चुनाव प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगा। अशोक और कुछ पदाधिकारियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का असर आकाश आनंद पर भी पड़ा। आकाश के करीबियों ने पदाधिकारियों की कार्यशैली में बदलाव की जरूरत बताई थी। इस बयान को पार्टी नेतृत्व के सामने अलग तरीके से पेश किए जाने की भी चर्चा है।