बिजली आपूर्ति की खस्ताहाल व्यवस्था और अभियंताओं की लामबंदी ने पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल की मुश्किलें बढ़ा दीं। लगातार मिल रही शिकायतों के कारण उन्हें ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है।
इससे पहले भी ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा कई बार डॉ. आशीष गोयल के खिलाफ मुखर रहे और उन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने तक के आरोप लगाए, लेकिन डॉ. गोयल अपने पद पर बने रहे। मंत्री की बार-बार शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद वे न केवल पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पद पर डटे रहे, बल्कि उन्हें ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दे दी गई।
हाल ही में कई कर्मचारियों का स्थानांतरण (तबादला) करने के बाद उन्हें गुपचुप तरीके से मनचाही जगहों पर समायोजित कर दिया गया, जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची। इसी बीच विभाग में दलित एवं पिछड़े वर्ग के अभियंताओं के उत्पीड़न का मुद्दा गरमा गया। अभियंताओं ने उत्पीड़न से जुड़े 20 मामलों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही, लगभग 8 लाख कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली 'आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति' ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया और मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री तथा पार्टी पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपे।
इसी दौरान प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी चरमरा गई और एक साथ 13 उत्पादन इकाइयां ठप हो गईं। चरमराती बिजली आपूर्ति और चौतरफा विरोध के बीच रविवार को जारी स्थानांतरण सूची में डॉ. आशीष गोयल को ऊर्जा विभाग से हटाकर श्रम विभाग में भेज दिया गया। अब ऊर्जा विभाग की कमान रणवीर प्रसाद को सौंपी गई है, जो इससे पहले भी पावर जनरेशन कॉरपोरेशन (विद्युत उत्पादन निगम) में प्रबंध निदेशक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।