शहरी सीमा के बाहरी क्षेत्र में मकान बनाने वालों को सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। अब शहर के भीतरी व बाहरी क्षेत्रों में भूमि व उपयोग के आधार पर वाह्य विकास शुल्क नए सिरे से तय होंगे। यह शुल्क शहर के अंदर अधिक और बाहर कम होगा।
कृषि व औद्योगिक उपयोग की भूमि पर वाह्य विकास शुल्क आवासीय और व्यावसायिक की तुलना में कम होगा। आवास विभाग की समीक्षा में मंगलवार को सीएम योगी ने अधिकारियों और विकास प्राधिकरणों को इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने प्रस्तावित शहरी पुनर्विकास नीति के ड्राफ्ट को भी देखा और इसे शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए।
बैठक में आवास विभाग ने सीएम के सामने शहरों में नक्शा पास करने पर लगने वाले वाह्य विकास शुल्क नीति और शहरी पुनर्विकास नीति का ड्राफ्ट पेश किया। इस पर सीएम ने वाह्य विकास शुल्क नीति को व्यावहारिक और जनहित के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए। कहा कि कृषि एवं औद्योगिक उपयोग की भूमि पर वाह्य विकास शुल्क आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की तुलना में कम होना चाहिए।
स्थानीय नगर निकाय सीमा के अंदर और बाहर की भूमि पर भी शुल्क की दरों में अंतर किया जाए। ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें सामान्य व्यक्ति स्वयं अपने वाह्य शुल्क की गणना कर सके। इससे प्राप्त राशि का उपयोग जनसुविधाओं के विकास में किया जाए। इसके लिए विकास प्राधिकरणों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। सीएम ने निर्देश दिए कि नीति में भूमि पुनर्गठन, निजी निवेश को प्रोत्साहन, पारदर्शी पुनर्वास व्यवस्था और प्रभावित परिवारों की आजीविका की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। किसी की संपत्ति या जीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।