Supreme court on TET qualification
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सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की टीईटी की अनिवार्यता किए जाने को लेकर प्रदेश के शिक्षकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसे लेकर शिक्षकों ने चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू कर दिया है। साथ ही केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए भी प्रक्रिया तेज हो गई है।
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की प्रांतीय पदाधिकारियों बैठक मंगलवार को प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 11 से 20 सितंबर तक प्रधानमंत्री व सूबे के मुख्यमंत्री को परिवारजनों के द्वारा पत्र भेजा जाएगा।
इसमें केंद्र सरकार के 2017 के संशोधन को 2017 से लागू न करने की मांग की जाएगी। 2017 के संशोधन को निरस्त करने की मांग की जाएगी ताकि शिक्षकों की नौकरी पर संकट न खड़ा हो। संगठन ने सभी जिलों के पदाधिकारियों को 21 से 27 सितंबर तक अपने जनप्रतिनिधियो को टेट की अनिवार्यता के निर्णय से पैदा दिक्क़तों व कठिनाइयों से अवगत कराया जाएगा। साथ ही उनसे निवेदन किया जाएगा कि केंद्र सरकार के द्वारा 2017 में किए गए संशोधन को निरस्त किया जाए। महामंत्री आशुतोष मिश्र ने नेतृत्व पांच सदस्य समिति का गठन किया गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर विधिक सलाह लेगी, उसी के अनुसार आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
बैठक में अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, महामंत्री आशुतोष मिश्र, रचना राजपूत, उपाध्यक्ष निशा सिंह, ज्ञानेंद्र शंकर त्रिपाठी, अजय सिंह, अनुराग सिंह, दिनेश सिंह, रश्मि सक्सेना, मनोज यादव, पीयूष त्रिपाठी आदि उपस्थित थे। दूसरी तरफ सेवा एक अन्य शिक्षक संगठनों की ओर से 10 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर टेट के मामले में ज्ञापन दिया जाएगा। शिक्षक नेता सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि इसके माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से आदेश पर पुनर्विचार की अपील प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से की जाएगी।