राजनीति में यह एक आजमाया हुआ फॉर्मूला रहा है। यदि पार्टी पूर्ण बहुमत या मजबूत स्थिति में आती है, तो अखिलेश यादव बाद में किसी सुरक्षित सीट पर उपचुनाव लड़कर आसानी से विधानसभा (या सदन) में प्रवेश कर सकते हैं, जैसा कि वह पहले भी कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह कोई पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर अनूठा राजनीतिक कदम उठाया हो। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जब समाजवादी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला था, तब अखिलेश यादव लोकसभा सांसद (कन्नौज से) थे। चुनाव के बाद पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और बाद में विधान परिषद के रास्ते प्रदेश की कमान संभाली थी।