अपनी ही विधानसभा नहीं जिता पाए
उन्होंने कहा कि भाजपा ने जनता के विश्वास और आस्था तक को ठगने का काम किया है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि अब भाजपा के लोग भी अपने ही नेताओं का इस्तीफा मांगेंगे, क्योंकि जो अपनी ही विधानसभा नहीं जिता पाए, उनके भरोसे पार्टी आगे कैसे बढ़ेगी। यह हार उन लोगों की भी है जिन्होंने संगठन पर अपनी पसंद थोपकर नेतृत्व तय किया।
सपा प्रमुख ने भाजपा के संगठनात्मक नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि "सबसे ज्यादा खुश वे लोग हैं जिन्हें पीडीए समाज से होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर का पद नहीं दिया गया।" उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब लोग पूछ रहे हैं, "5 बड़ा या 7?" साथ ही यह भी कहा कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष विधानसभा नहीं जिता पाए तो प्रदेश अध्यक्ष विधानसभा चुनाव कैसे जिताएंगे।
डबल इंजन की डबल हार
अखिलेश यादव ने इसे "डबल इंजन की डबल हार" करार देते हुए कहा कि भाजपा की सबसे सुरक्षित और परंपरागत सीटें भी अब उसे नहीं बचा पाएंगी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में भाजपा के लिए टिकट लेने वाले उम्मीदवार भी ढूंढना मुश्किल हो जाएगा।
अंत में उन्होंने विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाएंगे। साथ ही उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "लड्डू तो भाजपा के अंदर भी बंट रहे हैं।"