पीडीए की राजनीति पर सपा का जोर
समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीति पर खास जोर दिया था। लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में भी सपा इसी रणनीति को आगे बढ़ाती नजर आ रही है।
पिछड़े और दलित नेताओं को जोड़ने की कोशिश
पीडीए के विस्तार के तहत समाजवादी पार्टी दूसरे दलों के पिछड़े और दलित नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने में जुटी है। अखिलेश यादव अपनी जनसभाओं में लगातार दलितों और पिछड़ों के मुद्दे उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि जो पीड़ित है, वह पीडीए का हिस्सा है और समाजवादी पार्टी में सभी की बात सुनी जाएगी।
अखिलेश यादव भाजपा सरकार पर दलितों और पिछड़ों के साथ अत्याचार होने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर इन वर्गों को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए काम किया जाएगा। अब 26 नवंबर को जारी होने वाले ‘पीडीए के प्रणपत्र’ पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।