फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: फिर पुराने रंग में दिखे आकाश आनंद, कमल को कीचड़ में फेंक देने की कही बात; बयानों की वजह से गंवाया था पद

Mon, 10 Aug 2026 09:15 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Akash Anand: यूपी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले आकाश आनंद एक बार फिर से आक्रामक नजर आ रहे हैं। इसके पहले लोकसभा चुनाव में यह अंदाज दिखा था। 
विज्ञापन
अपने बयान से फिर चर्चाओं में आए आकाश आनंद। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जाट लैंड से बसपा के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने आक्रामक चुनावी शंखनाद कर दिया है। अपनी जनसभा में उन्होंने भाजपा के डबल इंजन के दावों और सपा-कांग्रेस गठबंधन की राजनीति की जमकर घेराबंदी की। उन्होंने जनता से अपील की कि इस बार हाथी के सामने वाला बटन दबाकर कमल को कीचड़ में फेंकने का काम करें।
विज्ञापन


आकाश आनंद ने यह साफ कर दिया कि बसपा अब आक्रामक तेवरों के साथ मैदान में उतर चुकी है। महात्मा ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, नारायण गुरु, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के विचारों का आह्वान करते हुए उन्होंने बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल को सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का एकमात्र सफल मॉडल करार दिया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नितिन गडकरी कहते हैं कि 2024 तक भारत की सड़कें अमेरिका जैसी बना देंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि देश का सबसे महंगा और घटिया एक्सप्रेस-वे भाजपा नेताओं के करीबियों द्वारा बनाया जा रहा है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन मुस्लिम-जाट-यादव समीकरण के भरोसे है। बीएसपी खुद को एकमात्र ऐसी पार्टी के रूप में पेश कर रही है, जो भाजपा की नीतियों पर सबसे सुसंगत और तथ्य आधारित हमला बोल रही है। बसपा इस बार केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि भाजपा के डबल इंजन और सपा-कांग्रेस गठबंधन के पीडीए समीकरण को सीधी चुनौती देकर प्रदेश में मायावती को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य के साथ उतर चुकी है।

एक भाषण के बाद यूपी से हुए थे दूर
आकाश आंनद का आज दिया हुआ भाषण सुर्खियों में है। इसके पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोला था। इसके बाद मायावती ने उनसे उत्तर प्रदेश में प्रचार समेत कई जिम्मेदारियां वापस ले ली थीं। उन्हें पार्टी से बाहर करने के साथ ही उत्तराधिकारी के पद से भी हटा दिया गया था। इससे उनके सियासी सफर पर ग्रहण लगा लेकिन वह जल्द ही इससे उबर गए।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें