लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस नेताओं को उम्मीद थी कि वे विधानसभा चुनाव में सियासी मैदान में दमखम के साथ उतरेंगे ही नहीं बल्कि सत्ता में भागीदारी के लिए सीटें भी जीतेंगे। संगठन के दम पर गठबंधन में हिस्सेदारी लेंगे। यह उम्मीद टूट रही है। सूत्रों का कहना है कि कानपुर और आगरा मंडल के पूर्व विधायक व कुछ अन्य नेता दूसरे दलों के संपर्क में हैं। वे ऐन मौके पर पाला बदलने की तैयारी में हैं। कांग्रेस के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी अपने समर्थकों के साथ मंथन में लगे हैं कि अगला कदम किधर बढाया जाए? पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी के बाद इन नेताओं ने दूसरे दलों की ओर कदम बढाया तो कांग्रेस के लिए बड़ा सियासी नुकसान होना तय है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी रायबरेली से सांसद हैं। वह उत्तर प्रदेश आते हैं और रायबरेली से चले जाते हैं। सांसदों व चंद नेताओं को छोड़ दिया जाए तो उनका पार्टी के अन्य नेताओं से रिश्ता नहीं दिखता है। पार्टी महासचिव सांसद प्रियंका गांधी भी दूरी बनाई हुई हैं। ये नेता उत्तर प्रदेश में तो आते हैं, लेकिन प्रदेश मुख्यालय तक आने की जरूरत नहीं समझते। इसे भी पार्टी की कमजोरी की एक वजह मानी जी रही है।
पार्टी में सभी का सम्मान है। हमारी कोशिश है कि कोई भी कांग्रेस छोड़कर न जाए बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोग जोड़े जाएं। पार्टी पूरी शिद्दत से वोटबैंक बढ़ाने के अभियान में लगी है। जनता का सहयोग मिल रहा है। यदि किसी को नाराजगी होगी तो समझा बुझाकर मना लिया जाएगा।- अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस।
कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी को मनाने की कोशिश जारी है। शनिवार देर शाम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय ने उनसे मुलाकात की। नसीमुद्दीन के मुताबिक दोनों से शिष्टाचार भेंट हुई है। उनके साथ इस्तीफा देने वालों की बड़ी संख्या हैं। प्रदेश अध्यक्ष की भावना से सभी को अवगत कराया जाएगा। तभी मिलकर अगला निर्णय लेंगे। हालांकि उन्होंने इशारा किया कि कांग्रेस की ओर कदम लौटने की संभावना कम है। दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सूझबूझ वाले नेता हैं। उनसे बात की गई है। भरोसा है कि वह कांग्रेस में लौट आएंगे।