अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही मामले की प्रारंभिक जांच के लिए शासन ने उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। जिसमें जल निगम (ग्रामीण) के मुख्य अभियंता, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के एक मुख्य अभियंता और एक अधीक्षण अभियंता रहेंगे। कमेटी को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
16,000 से ज्यादा टंकियों का हो चुका है परीक्षण
प्रदेश में अभी तक जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत 16,000 से अधिक टंकियों का सफल परीक्षण किया जा चुका है। इनमें से पांच टंकियों के निर्माण की गुणवत्ता खराब होने की वजह से क्षतिग्रस्त होने की शिकायत मिली थी। इस आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है।