लखनऊ के छह अस्पतालों में इलाज और बिलिंग में गड़बड़ी
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योगी सरकार लगातार आयुष्मान योजना का लाभ पात्र गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने एवं उन्हें बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के निर्धारित नियमों के अनुसार इलाज उपलब्ध कराने के लिये कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप मंगलवार को टीमों ने लखनऊ 6 क्रमशः चंद्रावती हॉस्पिटल, दुबे जी हॉस्पिटल, जीवक हॉस्पिटल, काइंड हॉस्पिटल, मेडलाइफ रिसर्च एंड ट्रॉमा सेंटर और एस.आर. हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पतालों के रिकॉर्ड, मरीजों के बयान और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जांच की गई।
जांच में कुछ मरीजों को सामान्य बीमारी होने के बावजूद रिकॉर्ड में आईसीयू और एचडीयू में भर्ती दिखाने के मामले सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों ने अधिक भुगतान पाने के लिए इलाज के पैकेज में हेरफेर की। इसके अलावा, योजना के तहत इलाज कैशलेस होने के बावजूद कुछ मरीजों और उनके तीमारदारों से नकद पैसे लेने की शिकायतें मिलीं। जांच में ड्यूटी रोस्टर में गड़बड़ी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और गंभीर मरीजों के इलाज में प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी भी पाई गई।
गोंडा के 15 अस्पतालों में सुविधाओं की कमी
गोंडा में भी 15 अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इनमें सुधा न्यूरो एंड ट्रॉमा सेंटर, एपेक्स हॉस्पिटल, कृष्णा केयर सेंटर, जीवन दीप हॉस्पिटल, गायत्री हॉस्पिटल, सनराइज हॉस्पिटल ऑर्थो एंड मैटरनिटी सेंटर, किरण हॉस्पिटल, फैमिली हॉस्पिटल, लाइफ लाइन हॉस्पिटल, मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, नूर हॉस्पिटल, कृष्णा हॉस्पिटल, श्री कृष्ण कुमार मौर्य मेमोरियल लाइफ केयर हॉस्पिटल, नारायण हॉस्पिटल एंड कैंसर रिसर्च सेंटर और अवध हॉस्पिटल शामिल हैं।
जांच टीमों को कई अस्पतालों में आयुष्मान योजना से संबंधित जरूरी जानकारी, टोल फ्री नंबर और शिकायत के लिए संपर्क सूत्र प्रदर्शित नहीं मिले। कुछ अस्पतालों में बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण और संक्रमण से बचाव के इंतजामों में भी कमी पाई गई। एक अस्पताल में पैथोलॉजी लैब नहीं थी और मान्यता प्राप्त लैब से अनुबंध भी नहीं मिला।
वहीं, एक अन्य अस्पताल में बेसमेंट में ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू संचालित होने की बात सामने आई। अग्निशमन उपकरणों पर भी जरूरी जानकारी नहीं मिली। राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत घटिया इंप्लांट लगाने की शिकायतें भी जांच में सामने आईं।
लापरवाही पर अस्पतालों को नोटिस
साचीज की सीईओ ने बताया कि जांच में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अस्पतालों से जवाब मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उनसे पूछा जाएगा कि अनियमितताओं के आधार पर उनकी सूचीबद्धता समाप्त करने और वित्तीय नुकसान की वसूली जैसी कार्रवाई क्यों न की जाए। अस्पतालों के जवाबों की समीक्षा के बाद नियमानुसार जुर्माना लगाने, योजना से बाहर करने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने पर निर्णय लिया जाएगा।