अलीगढ़, अंबेडकर नगर, अमेठी, अमरोहा, औरैया, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, देवरिया, एटा, इटावा, फिरोजाबाद, गाजीपुर, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर देहात, , कासगंज, कौशांबी, खीरी (लखीमपुर खीरी), कुशीनगर, महाराजगंज, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, मिर्जापुर, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, संभल, संत कबीर नगर, संत रविदास नगर, शाहजहांपुर, शामली, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, उन्नाव, फर्रुखाबाद, बांदा, फतेहपुर, बलरामपुर, बलिया और जालौन
प्रदेश के 12 ऐसे जिले हैं जहां पहले से ही सेंटर चल रहे हैं। इसमें वाराणसी, आगरा, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर नगर, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर जिले शामिल हैं। चार जिले चित्रकूट, बागपत, महोबा और ललितपुर ऐसे हैं जहां सेंटर नहीं खोले जाएंगे। इन चारों जिलों के लोगों को अपने पास वाले जिले में ये सुविधा मिलेगी।
आधार सेवा केंद्रों पर जिले की जनसंख्या के आधार पर मेन पॉवर व मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसलिए मनीशों की संख्या 4 से 16 तक होगी। जो बड़े जिले हैं वहां 16 तक मशीनें लगेंगी। इससे आधार बनवाने से लेकर अपडेट करवाने में लोगों को सहूलियत होगी। जिन बैंकों व डाक घरों में वर्तमान समय में आधार की सुविधा हैं वहां दो से चार मशीनें ही हैं। क्षमता कम होने से आधार के काम भी कम हो पाते हैं। एएससी खुलने से क्षमता बढ़ेगी तो अधिक से अधिक लोगों के काम होंगे।
समीक्षा में पाया गया कि जिलों में आधार संबंधी काम करवाने के लिए अधिक केंद्रों की जरूरत है। इसलिए 59 और केंद्र खोलने की तैयारी है। कई चरण में ये सभी केंद्र खोले जाएंगे। इससे लाखों लोगों को सुविधा मिलेगी। - प्रशांत कुमार सिंह, उपमहानिदेशक यूआईडीएआई लखनऊ