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UP: संपत्ति पंजीकरण में पारदर्शिता के लिए यूपी में लागू होगा आधार प्रमाणीकरण; जानें किस तारीख से होगा अनिवार्य

Thu, 29 Jan 2026 07:48 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ के इंदिरानगर तकरोही इलाके में पति के मजाक से आहत 23 वर्षीय विवाहिता ने फंदा लगाकर जान दे दी। चार साल पहले प्रेम विवाह करने वाली महिला मॉडलिंग सीख रही थी। घटना के समय घर में पति और साली मौजूद थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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प्रदेश के स्टाम्प तथा पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने दस्तावेजों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन एवं संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण प्रणाली में आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था को लागू किया जा रहा है।

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मंत्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 28 अगस्त 2025 को सम्पन्न स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में संपत्ति पंजीकरण के दौरान छद्म व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली फर्जी रजिस्ट्रियों पर प्रभावी रोक लगाने हेतु आधार प्रमाणीकरण लागू किए जाने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों के क्रम में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी की गई हैं।

अधिसूचना 2 अगस्त 2024 के माध्यम से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा–69 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024 को प्रवृत्त किया गया है। इसके अंतर्गत आधार संख्या धारकों की पहचान ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण एवं ई-हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्थापित की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि विलेख पंजीकरण के दौरान निष्पादकों, पक्षकारों एवं गवाहों की पहचान सत्यापन के लिए आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था एक फरवरी 2026 से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों में लागू कर दी जाएगी। इस संबंध में समस्त उप निबंधक कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से छद्म व्यक्तियों द्वारा पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगेगी, पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा भूमि एवं अचल संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेज और विवादों में कमी आएगी। इससे डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था सशक्त होगी, विधिक विवादों एवं न्यायालयीन वादों में कमी आएगी और नागरिकों के संपत्ति अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। यह व्यवस्था राज्य सरकार के डिजिटल गवर्नेंस लक्ष्यों के अनुरूप है।
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