ऐसे होता है खेल
फर्जी फर्में दूसरे राज्यों के जिलों में माल की सप्लाई दिखाती हैं, जबकि वास्तविक खरीदार यूपी में होता है। ई वे बिल और अन्य दस्तावेज बाहरी राज्यों की फर्मों के नाम पर बनाए जाते हैं, लेकिन माल यूपी में ही उतार दिया जाता है। ऐसे मामलों में यूपी के अधिकारियों के लिए जांच करना मुश्किल हो जाता है।
इन कारोबारों में बढ़ी गड़बड़ी
विभागीय जांच में लोहे और एल्यूमीनियम स्क्रैप, स्टील, गैर-ब्रांडेड कपड़े, रेडीमेड गारमेंट, प्लास्टिक दाना, कागज और पैकेजिंग सामग्री में फर्जी इनवॉइस व ई वे बिल के मामले बढ़े हैं। प्लास्टिक कारोबार में फर्जी बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल भी बढ़ा है।
नई फर्मों पर निगरानी का सुझाव
अधिकारियों के मुताबिक, नई फर्म दो महीने में एक हजार ई वे बिल जारी कर सकती हैं। प्रत्येक बिल में 10 से 30 लाख रुपये का माल दिखाने पर कागजों में 100 से 300 करोड़ रुपये का कारोबार बन जाता है। बाद में फर्म बंद होने पर वसूली मुश्किल होती है।
विभाग ने नई और जोखिम वाली फर्मों को शुरुआत में सीमित ई वे बिल जारी करने और पहले 10 बिलों का विवरण देने के बाद अगले 25 व फिर 100 बिल जारी करने जैसी चरणबद्ध व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। इससे टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।