विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ में इस औद्योगिक भांग की खेती से किसान पारंपरिक फसलों की तुलना में तीन से पांच गुना अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। अब तक भांग की खेती पर कड़ी पाबंदी थी। कम नशे वाली किस्म आने से किसान आबकारी विभाग से आसानी से लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे और इसका उत्पादन कर सकेंगे।
दुनिया भर में है मांग: विश्व औद्योगिक भांग (हेम्प) बाजार वर्ष 2024 में करीब आठ बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है। वर्ष 2030 तक इसके दोगुना होने का अनुमान है। ऐसे में सीमैप की इस नवाचार से भारत के किसानों को एक उच्च मूल्य वाली नकदी फसल का नया विकल्प मिलेगा, जिसके उत्पाद फाइबर, बीज, तेल और औषधीय अर्क देश-विदेश में भारी मांग रखते हैं।
कैंसर और दर्द प्रबंधन में उपयोगी: भांग में पाया जाने वाला सीबीडी तत्व कैंसर से जुड़े दर्द, कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव, न्यूरोलॉजिकल दर्द, सूजन और मानसिक तनाव को कम करने में प्रभावी है। इसके तेल का उपयोग मुंहासे, एक्जिमा, सोरायसिस, भूख बढ़ाने वाली दवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। फार्मा कंपनियों के लिए यह नई किस्म एक बड़ा अवसर बनेगी।
सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी का कहना है कि भारत सरकार के सहयोग से आने वाले समय में कैनबिस के इस नए किस्म के बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जो आबकारी विभाग से लाइसेंस लेकर खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी।