साइबर ठग अक्सर ऐसे लोगों को अपना निशाना बनाते हैं जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती है या जो रातों-रात अमीर बनने का सपना देखते हैं। ये अपराधी भोले-भाले लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवा लेते हैं। ठगी के जरिए लूटा गया पैसा इन्हीं खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इन म्यूल खातों का उपयोग इसलिए किया जाता है, ताकि पुलिस की जांच में असली अपराधी की पहचान न हो सके और वे पकड़े जाने से बच जाएं।
बैंकिंग सिस्टम पर उठ रहे गंभीर सवाल
- एक ही गांव के कई मजदूरों के खाते एक पैटर्न में कैसे खुल गए
- खातों में बड़े ट्रांजेक्शन किस आधार पर किए गए
- खाताधारक दैनिक मजदूरी करने वाले, फिर भी जांच क्यों नहीं हुई
सुरक्षा के उपाय
- किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता न खुलवाएं।
- अपने बैंक खाते की जानकारी, जैसे खाता संख्या, पिन, ओटीपी आदि किसी के साथ साझा न करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अपने बैंक और पुलिस को दें।
पुलिस ने शुरू की जांच
साइबर थाना प्रभारी रंधा सिंह का कहना है कि सात मजदूरों के नाम पर म्यूल खाते खुलवाकर उनमें लाखों रुपये की ठगी की रकम का लेनदेन किया गया है। गुजरात पुलिस की जांच में खुलासा होने के बाद पीड़ितों ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।