यूपी में बिजली व्यवस्था।
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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कार्पोरेशन एवं निगमों के प्रबंधन पर कार्मिकों के साथ टकराव का माहौल बनाने, जान बूझकर महाकुंभ से पहले बिजली व्यवस्था बेपटरी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन हो रहा है। एकमुश्त समाधान योजना का क्रियान्वयन भी चल रहा है। इसके बाद भी कार्पोरेशन प्रबंधन ने हर डिस्काम से अभियंताओं को निलंबित करना शुरू कर दिया है। यह ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति पैदा करने का साजिश है। अभियंताओं ने कहा कि रविवार को झांसी में होने वाले बिजली पंचायत में भी इस मुद्दे पर मंथन किया जाएगा और कार्पोरेशन के मंसूबे को पूरा नहीं होने दिया जाएगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी राजीव सिंह, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, सुहैल आबिद, पीके दीक्षित, राजेंद्र घिल्डियाल, चंद्र भूषण उपाध्याय, आर वाई शुक्ला, छोटेलाल दीक्षित, देवेन्द्र पाण्डेय, आर बी सिंह, राम कृपाल यादव, मो वसीम आदि ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अन्य अभियंताओं पर उत्पीड़न की कार्यवाही प्रबंधन की बौखलाहट का नतीजा है। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश में सर्वाधिक बिजली की आपूर्ति 30618 मेगावॉट का कीर्तिमान बनाकर प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन किया।