आईआईटीआर की ओर से विकसित पीओपी एफएएस-गार्ड तकनीक पीने के पानी से कई तरह के पीफास रसायनों को हटाने में सक्षम है। संस्थान इस तकनीक को व्यावसायिक उपयोग के लिए बंगलूरू की एक कंपनी को हस्तांतरित करने की तैयारी कर रहा है।
उपभोक्ता उत्पादों में पीफास का चल रहा है आकलन
आईआईटीआर के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने बताया कि संस्थान में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के सहयोग से एक महत्वपूर्ण परियोजना चल रही है। इसके तहत भारत में उपभोक्ता उत्पादों में पीफास की मौजूदगी, इनके उत्पादन, आयात, निर्यात और उपयोग का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है। इससे भविष्य में इन रसायनों के लिए राष्ट्रीय मानक और नियम बनाने में मदद मिलेगी।
जानिए क्या है आईआईटीआर: भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक प्रमुख प्रयोगशाला है। 1965 में लखनऊ में स्थापित यह संस्थान औद्योगिक और पर्यावरणीय रसायनों के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों, खाद्य सुरक्षा और जल, मृदा प्रदूषण पर शोध के लिए जाना जाता है।