वर्ष 2022-2023 में प्रदेश के गो आश्रय स्थलों में 34957 गोवंश की मौत हुई है जबकि पांच साल में 73039 पशुओं की जान गई है। छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए सरकार ने प्रदेश भर में गो आश्रय स्थल बनाए हैं। विधायक आराधना मिश्रा मोना एवं पूजा के सवाल पर विधानसभा में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने यह जवाब दिया।
पशुधन मंत्री ने जवाब दिया कि गो आश्रय स्थलों में बेसहारा गोवंशों को संरक्षित करने के लिए परामर्शी निर्देश एवं मानक निर्धारित किये गए हैं। सभी जिलों में 120 लाख प्रति केन्द्र की इकाई लागत से वृहद गो संरक्षण केन्द्र की स्थापना का मानक है जिसे बढ़ाकर सरकार ने 160.12 लाख रुपये कर दिया गया है।
6713 गो आश्रय स्थलों में 1131378 गोवंश संरक्षित किए गए। भूख से किसी गोवंश की मृत्यु नहीं हुई। अधिकांशतः मृत्यु स्वाभाविक कारणों जैसे अधिक उम्र, शारीरिक शिथिलता तथा दुर्घटनावश विकलांगता के कारण होती हैं। मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम पशुचिकित्सकों द्वारा किया जाता है। विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह के सवाल पर उन्होंने जवाब दिया कि विकास खण्ड-लालगंज के चॉंदा में कान्हा गोशाला का निर्माण नगर पालिका लालगंज द्वारा कराया जा रहा है तथा ग्राम बन्नावा में वृहद गो संरक्षण केन्द्र निर्माणाधीन है।
लंपी से किसी पशु की मौत नहीं
रालोद विधायक चंदन चौहान के सवाल पर पशुधन मंत्री ने जवाब दिया कि प्रदेश में माह अप्रैल, 2023 से जुलाई, 2023 तक लंपी स्किन डिजीज से कुल 52 पशु प्रभावित होने की सूचना प्राप्त हुई है, जिनका उपचार किया गया। इस अवधि में किसी भी प्रभावित पशु की मृत्यु नहीं हुई है।