उन्नाव सामूहिक दुष्कर्म कांड की जांच में सीबीआई की सुस्त रफ्तार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। सीबीआई की ओर से दाखिल प्रगति रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा कि एजेंसी जांच में तेजी लाए। हर काम के लिए उसे कोर्ट से आदेश मांगने की जरूरत नहीं है, जिसे वह करने में खुद सक्षम है। कोर्ट ने जमानत पर रिहा आरोपियों की बेल निरस्त कराने के लिए कोई प्रयास नहीं करने पर भी नाराजगी जताई।
मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने सीबीआई की रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा-अभी तक पीड़िता और उसके रिश्तेदारों का बयान क्यों नहीं लिया गया? पीड़िता के पिता की पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत के जिम्मेदार लोग भी अभी तक गिरफ्तार नहीं किए गए।
जमानत पर रिहा हो चुके आरोपियों की जमानतें निरस्त कराने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया। आरोपी बाहर हैं और वह केस प्रभावित कर सकते हैं। कोर्ट ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और दूसरे आरोपियों को उन्नाव जेल से हटाकर लखनऊ जेल नहीं भेजने पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि पीड़िता और उसके परिवार के लोगों का बयान दर्ज करे तथा अपने अधिकारों का प्रयोग करे। सीबीआई को हिदायत दी है कि वह हर बार कोर्ट से आदेश लेने के बजाए स्वयं कदम उठाए, अन्यथा हमें जांच अधिकारी के खिलाफ आदेश देने में हिचक नहीं होगी। कोर्ट ने सीबीआई को 15 दिन की मोहलत देते हुए 21 मई को पुन: प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
गैंगरेप के आरोपियों को इतनी जल्दी कैसे मिली जमानत
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उन्नाव गैंगरेप के आरोपियों को लखनऊ खंडपीठ से जमानत मिल जाने पर हैरानी जताते हुए पीठ ने कहा कि जब 15-20 साल से आरोपी जेल में बंद हैं तो गैंगरेप के आरोपियों को छह माह में जमानत कैसे मिल गई। पीड़िता की मां के वकील का कहना था कि नामजद आरोपी मनोज सिंह की भी अभी तक गिरफ्तारी नहीं की गई है। कोर्ट ने आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने वाले का पता लगाया जाए तथा हिरासत में हुई मौत के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
जमानतें निरस्त न कराना सदमा देने वाला कार्य
अदालत ने कहा कि जमानत पर रिहा आरोपियों की जमानतें निरस्त न कराना सदमा देने वाला कार्य है। कोर्ट में मौजूद सीबीआई के एएसपी राघवेंद्र वत्स अग्रिम कार्यवाही के लिए एक सप्ताह की मोहलत मांगी है। अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी और सुमित गोपाल ने अदालत का सहयोग किया।
पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज केस की जांच लखनऊ ट्रांसफर करने की अर्जी
पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे की जांच उन्नाव से हटाकर लखनऊ स्थानांतरित करने की मांग की है। इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीड़िता की मां की ओर से अधिवक्ता देशरतन चौधरी ने अर्जी दाखिल कर कहा कि विधायक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसलिए मामले की जांच उन्नाव के बजाए लखनऊ स्थानांतरित की जाए। अर्जी में कहा गया है कि पीड़िता के पिता पर आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने वाला टिंकू सिंह लापता है। उसका पता लगाया जाए कि किसने कहने पर उसने फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। अधिवक्ता का कहना था कि विधायक पर दर्ज हत्या के एक मुकदमे में भी रिमांड बनाया जाए।
22 दिन से लापता है किशोरी का चाचा
किशोरी के पिता पर मारपीट व आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने वाला युवक (किशोरी का रिश्तेदार) 9 अप्रैल से लापता है। उच्च न्यायालय ने सीबीआई को उसका पता लगाने को कहा है।
माखी थाना क्षेत्र निवासी टिंकू सिंह पुत्र जंग बहादुर सिंह ने 3 अप्रैल को किशोरी के पिता (अब मृतक) के खिलाफ मारपीट और आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया था। न्यायिक हिरासत में मुकदमे के आरोपी (किशोरी के पिता) की नौ अप्रैल को जिला अस्पताल में इलाज के दौैरान मौत हो गई थी।
जेल में मुलाकात के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया
जेल में बंद भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर से गुपचुप तरीके से रोज तमाम लोगों की मुलाकात कराने के आरोपों के बाद जेल अधिकारियों ने मुलाकात की आनलाइन प्रक्रिया को और सख्ती से लागू कर दिया है। मुलाकात करने वाले को नियमानुसार अपना पहचान पत्र, कैमरे से उसकी आनलाइन फोटो और निर्धारित प्रारूप पर आनलाइन डेटा दर्ज होंगे। इसके बाद ही विधायक या किसी अन्य बंदी से मुलाकात कराई गई। बुधवार को किसी ने भी विधायक से मुलकात नहीं की। जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि पहले भी आनलाइन व्यवस्था चल रही थी। गुपचुप तरीके से किसी भी व्यक्ति की विधायक से मुलाकात कराने का आरोप गलत है।