कंट्रोल रूम के अधिकारी प्रधानों को संक्र्तमण संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए कोरोना से संबंधित लक्षण व बचाव के तरीके भी बताते हैं। ऐसे लोगों की किस तरह निगरानी की जानी है, यह भी समझाते हैं। कोरोना के लक्षण के मेल खाने पर तत्काल जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने की सलाह देते हैं और कंट्रोल रूम से भी सीएमओ को संबंधित गांव के प्रधान व परिवार से संपर्क कर समुचित जांच व इलाज का निर्देश दे दिया जाता है ।
बातचीत कर एसओपी भी बनाएंगे
सीएम हेल्पलाइन पर प्रधानोंए संक्र्तमण से प्रभावित परिवारों व मरीजों की ओर से आने वाले फोन पर हो रहे संवाद का विश्लेषण भी किया जा रहा है। इसके आधार पर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) भी तैयार करने की योजना है। इससे प्रदेश भर में देश के विभिन्न हिस्सों से लौटे लोग किस तरह संक्र्तमित हुए, जाना जा सकेगा। इससे जांच व इलाज की जरूरत समझने में आसानी होगी।
सरकार कोरोना की जांच के ज्यादा से ज्यादा लैब बढ़वाने की मुहिम में भी प्रयासरत है। इसके लिए अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले प्राइवेट लैब को जोड़वाने की कोशिश हो रही है। सचिव मुख्यमंत्री आलोक इसके लिए इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) व केंद्र सरकार से समन्वय कराने का काम कर रहे हैं। लखनऊ में दो व कानपुर में एक प्राइवेट लैब में जल्दी ही कोरोना जांच की सुविधा शुरू सकती है।
प्रधानों, सभासदों को भेजा गया ये संदेश
यदि आपके क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कोरोना बीमारी के लक्षण जैसे सूखी खांसी, बुखार एवं सांस लेने में तकलीफ हो तथा किसी देश/अन्य प्रदेश की यात्रा से लौटा हो, तो कृपया सीएम हेल्पलाइन नंबर 1076 पर तत्काल संपर्क करें।
जिलों के कंट्रोल रूम की भी मानीटरिंग शुरू
मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की मदद के लिए जिला स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूम की भी आज से मुख्यमंत्री कार्यालय ने मानीटरिंग शुरू कर दी। मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों ने प्रदेश के लगभग सभी कंट्रोल रूम से संपर्क कर उनके नोडल अधिकारियों व वरिष्ठ अधिकारियों से बात की। कंट्रोल रूम से संवाद के तौर तरीके व कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की और लोगों की संवेदनशीलता के साथ मदद के लिए जरूरी निर्देश दिए। प्रदेश के सभी जिलों के कंट्रोल रूम के फोन नंबर व नोडल अधिकारियों के नाम भी जारी कर दिए गए हैं।