- अमर उजाला के पास मौजूद वीडियो रिकॉर्डिंग में मृत दिखाए गए कई पतियों ने बताया है कि उनकी पत्नी के खातों में तो 30 हजार रुपये आए। जिस व्यक्ति की कोशिश से उन्हें यह राशि मिली, उसने 10-15 हजार रुपये तक ले लिए।
- बंथरा की ही माया देवी के पति सुरेश कुमार की मृत्यु 17 मई 2016 को हुई, मगर ऑनलाइन आवेदन में मृत्यु की तिथि 14 नवंबर 2019 दिखाकर योजना का लाभ दिया गया। जबकि, योजना का लाभ मृत्यु के साल भर के भीतर आवेदन करने पर ही दिया जाता है।
- बंथरा की ही रामरती के पति कल्लू की मौत तो 28 मई 2009 को हुई थी, पर उन्हें वर्ष 2019-20 में योजना का लाभ दिया गया। इसी तरह से चंद्रावल की बताशा पत्नी लेखई, पियारा पत्नी रज्जन, बंथरा की किरन देवी पत्नी सुभाष चंद्र, शिवपति पत्नी मुन्ना राठौर, श्माम रानी पत्नी कृष्ण कांत गुप्ता और श्यामवती पत्नी विजय कुमार को अपात्र होते हुए भी भुगतान किया गया।
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत लखनऊ के बंथरा में पिछले दो साल में मिलन देवी, रेखा, सोनी, शशी, सुनीता, रामा, संगीता शर्मा, रघुराई, रुची सविता, राम रानी, सन्नो, राजकुमारी, स्नीला देवी, मुन्नी, किरन, वंदना, ज्योति, काजल देवी, लीला, रंजना और बजिया को उनकी पति की कथित मृत्यु पर इस योजना का लाभ दिया गया।
पड़ताल में सामने आया है कि इन 21 महिलाओं के पति क्रमश: राम प्रकाश, बराती, धर्मवीर, राजोल, शंकर, राम कुमार, सत्य प्रकाश, रज्जन लाल, विनोद कुमार, भाई लाल, अमृत लाल, भगवती, छंगा, मो. इदरीश, रामचंद्र, मन्नू, संगीता, विवेक कुमार, राजेंद्र कुमार, सुजीत और राजू अभी भी जीवित हैं। यानी इन महिलाओं को फर्जी ढंग से भुगतान किया गया। वहीं, चंद्रावल में भी फर्जी लाभार्थी मिले हैं।
दोषियों को कठोर सजा मिलेगी
समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव के. रविंद्र नायक का कहना है, ‘मामले की जांच कराएंगे। अगर हमारे स्तर से कराई गई जांच में भी ये केस फर्जी पाए गए, तो दोषियों को नियमानुसार कठोरतम सजा मिलेगी।’