लखनऊ। ‘उफक’ का मतलब होता है क्षितिज। एक ऐसी जगह जहां जमीन व आसमान मिलते नजर आते हैं। डॉ. कमर रहमान एक ऐसी वैज्ञानिक व लेखिका हैं, जिन्होंने जमीन से उठकर आसमान का सफर तय किया और एक मुकम्मल स्थान हासिल किया। रविवार को उनकी पुस्तक ‘उफक : एन ऑटोबायोग्राफिकल जर्नी ऑफ कमर रहमान’ का विमोचन माल एवेन्यू स्थित होटल में हुआ, जहां उन्होंने अपने जीवन से जुड़े दिलचस्प पहलुओं पर रोशनी डाली।
संवाद के दौरान उन्होंने बीना कृष्णा केसवालों का जवाब दिया। आईटीआरसी की पूर्व वैज्ञानिक कमर रहमान ने वाकया सुनाया कि पेरिस की एक मस्जिद के बाहर सीरिया के एक प्रोफेसर भीख मांग रहे हैं। मैं सोचने पर मजबूर हो गई कि लड़ाइयां कैसे देश व लोगों की तकदीर बदल देती हैं। उन्होंने बताया कि तहजीब का शहर लखनऊ हमेशा उनके दिल में रहा। मजाज को उन्होंने याद किया। उनके खुद के जीवन के अनुभव, एक छोटे शहर शाहजहांपुर से लखनऊ और फिर काम के सिलसिले में दुनिया के तमाम देशों की यात्राएं कीं। घरों के भीतर बरसों तक काम करने वाली महिलाओं पर ‘इनडोर एयर पोल्यूशन’ पर उन्होंने रिसर्च किया।
भारत की दस श्रेष्ठ महिला वैज्ञानिकों में उन्हें शुमार किया जाता है। उन्होंने बताया कि यूपी में महिलाओं के लिए एक ‘बेगम हजरत महल वुमन टेकिभनकल यूनिवर्सिटी’ खोले जाने का पूर्व मुख्यमंत्री से आग्रह किया था मगर इस पर अमल नहीं हो सका। पुस्तक विमोचन समारोह में आईएएस नवनीत सहगल, फिल्मकार मुजफ्फर अली, अभिनेता अतुल तिवारी, डिजाइनर मीरा अली, जयंत कृष्ण, मो. अब्दुल्लाह, अमेरिकी डॉ. फराह खान भी मौजूद रहीं।
एक महिला राष्ट्रपति तक नहीं दे पाया अमेरिका
कमर रहमान ने तल्ख लहजे में कहा कि अमेरिका ने चाहे जितनी तरक्की कर ली हो, मगर आज तक यह देश किसी महिला को राष्ट्रपति नहीं बना सका। उन्होंने यूरोपीय देशों फ्रांस, जर्मनी के साथ बांग्लादेश की महिलाओं की तारीफ की। शादी न करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सब जतन करके देख लिए, युवावस्था में रोम गए तो फाउंटेन में सिक्के भी डाले मगर बात नहीं बनी। खास बात यह है कि एक इंटरनेशल कॉन्फ्रेंस में एक वैज्ञानिक ने उन्हें प्रपोज किया, पर उन्होंने मना कर दिया। बाद में उन वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार मिल गया।