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तेजी से बढ़ रहा टाइफाइड, 150 मरीज रोज मिल रहे, डेढ़ साल से पानी की जांच ठप

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राजधानी में तेजी से बढ़ रहा टाइफाइड। - फोटो : ??? ?????
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राजधानी में बीते 15 दिनों से बुखार और टाइफाइड का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में बुखार के 200-250 मरीज रोजाना आ रहे है।
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इनमें औसतन 150 मरीज टाइफाइड के निकल रहे हैं। टाइफाइड गंदे पानी से भी फैलता है और डेढ़ साल से शहर में पानी की जांच नहीं हुई है।
जब इसे लेकर सवाल किया गया तो जलकल विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने एक-दूसरे पर इसकी जिम्मेदारी की बात कहते हुए पल्ला झाड़ लिया।
बलरामपुर अस्पताल में इन दिनों मेडिसिन की ओपीडी में करीब 150 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। रोजाना करीब 70 से 80 मरीजों की खून की जांच कराई जा रही हैै।
इसमें 30 मरीजों की टाइफाइड की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। डॉक्टरों का कहना है इन दिनों करीब 10 फीसदी मरीज बुखार के बढ़े हैं।
इसी तरह सिविल अस्पताल की मेडिसिन की ओपीडी में 150-200 के बीच मरीज आ रहे हैं। इनमें रोजाना बुखार के 30-40 मरीजाें की खून की जांच कराई जा रही है, इनमें 10 मामले टाइफाइड के निकल रहे हैं।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके नंदा के मुताबिक, बुखार के मरीज भले ही पर टाइफाइड के आठ से दस मामले ही निकल रहे हैं।
उधर, लोकबंधु अस्पताल में भी करीब दस मरीज टाइफाइड के रोज निकल रहे हैं। बाकी मरीज सामान्य बुखार से पीड़ित हैं।
सीएमएस डॉ. अमिता यादव के मुताबिक, टाइफाइड के पॉजिटिव मामले आने की दर अभी कम है, पर सामान्य बुखार के मरीज कुछ बढ़े हैं।
इसी तरह बीआरडी महानगर, लोहिया के अस्पताल ब्लॉक, आठ सीएचसी और निजी अस्पतालों में रोजाना 93 मरीजों में टाइफाइड की पुष्टि हो रही है।
फैजुल्लागंज : डेढ़ दर्जन से अधिक मरीज
फैजुल्लागंज में डेढ़ दर्जन से अधिक लोग टाइफाइड की चपेट में हैं। इसमें कई मरीज निजी व सरकारी अस्पताल से उपचार करा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी ने बताया कि इलाके में टाइफाइड का प्रकोप बढ़ रहा है। इलाके में पानी की आपूर्ति भी ठीक नहीं है।
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संवेदनशील इलाकों में पानी की जांच ठप
बीमारी के लिहाज से अति संवेदनशील इलाकों में पानी की जांच करीब डेढ़ साल से ठप पड़ी है। जल संस्थान व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें संवेदनशील इलाकों में जाकर पानी के नमूनों की जांच करती थीं। पर कोरोना से पहले से यह व्यवस्था ठप है।
इन इलाकों से अधिक आ रहे मरीज
फैजुल्लागंज, खदरा, मशालची टोला, पुराने लखनऊ के कई इलाके, चिनहट समेत अन्य इलाकों से मरीज अधिक सामने आ रहे हैं।
टाइफाइड एक गंभीर बीमारी
टाइफाइड एक गंभीर बीमारी है। यह साल्मोनेला एन्टेरिका सेरोटाइप टाइफी बैक्टीरिया से होता है। यह साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से भी फैलता है। यह बैक्टीरिया खाने और पानी के जरिए लोगों के अंदर जाता है। आमतौर पर दूषित पानी व संक्रमित व बासी भोजन के सेवन से टाइफाइड होता है। घर में किसी एक सदस्य को टाइफाइड होने पर अन्य सदस्यों के भी इसके चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि तेज बुखार से शुरू होने वाली बीमारी टाइफाइड में लापरवाही बरतना जानलेवा साबित हो सकता है।
टाइफाइड के लक्षण
- पीड़ित व्यक्ति को सिर में दर्द होता है।
- शरीर में दर्द व कमजोरी के साथ दस्त की समस्या होती है।
- मरीज को 102 से 104 डिग्री तक बुखार रहता है।
- बड़े बच्चों में कब्ज तथा बच्चों में दस्त भी हो सकता है।
नियमित रूप से मिला रहे क्लोरीन
जलकल के महाप्रबंधक एसके वर्मा का कहना है कि गर्मियों के शुरू होते ही संक्रामक रोगोें के प्रसार को रोकने के लिए एक टीम सीएमओ द्वारा बनाई जाती है। यह टीम अलग-अलग जगह पर नमूने लेकर जांच कराती है। जांच रिपोर्ट पर जलकल पानी को शुद्ध करने के लिए जरूरी उपाय करता है। जरूरत होने पर क्लोरीन की मात्रा भी बढ़ाई जाती है। अभी जांच बंद हैं, लेकिन जलकल के सभी ट्रीटमेंट प्लांट पर क्लोरीन मिलाने और ब्लीचिंग का काम नियमित रूप से किया जा रहा है। यह एक नियमित प्रक्रिया है।
पानी की जांच जलकल की जिम्मेदारी
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि पानी की जांच जलकल विभाग की जिम्मेदारी है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की कोई भूमिका नहीं है। शासन के निर्देश पर टीम गठित होने बाद पानी के नमूनों के लिए संयुक्त टीम जाती थी।
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रोजाना आ रहे मरीजों का आंकड़ा
अस्पताल मरीज (बुखार) टाइफाइड पॉजिटिव मेडिसन ओपीडी में आ रहे मरीज
बलरामपुर 30-40 30 150-200
सिविल 30-40 10 150-200
लोकबंधु 10-20 10 50-60
बीआरडी महानगर 10-15 3 15-20
लोहिया का अस्पताल ब्लॉक 30-40 25 150
आठ सीएचसी 30-40 15 70-80
निजी अस्पताल की ओपीडी 150-200 50 150-200
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