लखनऊ। शादी का झांसा देकर नाबालिग छात्रा से दुराचार करने वाले राजवीर और राजकुमार को कोर्ट ने दोषी ठहराया है।
पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश श्याम मोहन जायसवाल ने राजवीर को उम्रकैद और 68 हजार रुपये, जबकि इस करतूत में शामिल राजकुमार को 14 वर्ष की कैद और 35 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने माना कि विवेचक ने मामले की विवेचना में लापरवाही की है। कोर्ट ने कहा कि विवेचक ने सालभर से भी अधिक समय तक पीड़िता को ढूंढने का कोई प्रयास नहीं किया।
पीड़िता के मेडिकल की सप्लीमेंट्री रिपोर्ट भी नहीं ली। कोर्ट ने अपने आदेश की एक प्रति पुलिस महानिदेशक को भेजने का आदेश दिया।
कहा कि महानिदेशक मामले की विवेचना में बरती गईं घोर लापरवाही का संज्ञान लें और विवेचकों के उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई कर कोर्ट को अवगत कराए।
इससे पहले सरकारी वकील शैलेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले की रिपोर्ट नाबालिग वादिनी ने जानकीपुरम थाने में 22 अगस्त 2016 को दर्ज कराई थी।
इसमें बताया था कि वह एक स्कूल के हॉस्टल में रहकर कक्षा पांच की पढ़ाई करने गई थी, जहां उसकी दोस्ती स्कूल में पढ़ने वाली दो लड़कियों से हो गई। दोनों ने पीड़िता को शादी कराने का झांसा दिया।
दोनों में से एक लड़की जुलाई-2015 में पीड़िता को शाहजहांपुर स्थित अपने घर ले गई। जहां उसके परिवार के लोगों ने उक्त लड़की के बड़े भाई राजवीर से पीड़िता की शादी करने का निर्णय लिया।
पीड़िता के अनुसार, शादी का झांसा देकर उसे गाजियाबाद ले जाया गया, जहां राजवीर ने कई दिनों तक दुराचार किया। राजवीर का छोटा भाई महावीर और राजवीर के जीजा राजीव ने भी उसके साथ गंदा काम किया। आरोपियों ने छह महीने तक उसे बंधक बनाए रखा और शोषण किया।
इसके बाद पीड़िता को राजवीर के दोस्त राजकुमार को सौंप दिया। जो पीड़िता को बिहार ले गया और दुराचार किया। एक दिन राजकुमार ने पीड़िता की बात उसके पिता से कराई।
पीड़िता किसी तरह पटना से 21 अगस्त 2016 को लखनऊ आई और रिपोर्ट दर्ज कराई। कोर्ट में राजवीर और राजकुमार के मामले की सुनवाई हुई, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं।