लखनऊ। गोमती नदी में प्रदूषण कम करने के लिए दो नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जा रहे हैं। फैजुल्लागंज से सटे लोनीपुरवा एसटीपी को मंजूरी मिल चुकी है और एक सप्ताह के अंदर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। वहीं कुकरैल नाले के किनारे बनने वाले एसटीपी का प्रस्ताव तैयार है, जो राज्यस्तरीय तकनीकी समिति की मंजूरी मिलने के बाद करीब छह महीने में जमीन पर उतर जाएगा।
इन दोनों एसटीपी के चालू होने पर गोमती में गिरने वाला प्रदूषण काफी हद तक घटेगा। वर्तमान में शहर के 26 नालों में से 19 नालों को भरवारा और दौलतगंज एसटीपी से जोड़ा जा चुका है। सात बड़े नाले अभी भी सीधे नदी में गिरते हैं, जिनसे प्रदूषण बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती को प्रदूषणमुक्त बनाने के निर्देश दिए थे। कोई बड़ा प्रोजेक्ट पास होकर नहीं आया है। यह दोनों प्रोजेक्ट पहले के हैं।
सीवर ज्यादा, एसटीपी कम
फिलहाल शहर में निकलने वाले कुल 790 एमएलडी गंदे पानी में से तीन एसटीपी मिलकर सिर्फ 520 एमएलडी का ही ट्रीटमेंट कर पाते हैं। यानी 270 एमएलडी सीवर पानी बिना शोधन सीधे गोमती में पहुंच रहा है। लोनीपुरवा और कुकरैल एसटीपी शुरू होने पर करीब 90 एमएलडी गंदा पानी कम जाएगा।
Iलोनीपुरवा एसटीपी का काम एक सप्ताह में रफ्तार पकड़ लेगा। अभी एक लीकेज के कारण धीमा है। यह लीकेज जल निगम नगरीय की टीम को दूर करना है। I
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- एसपी सरोज, प्रोजेक्ट मैनेजर जल निगम ग्रामीणI
Iकुकरैल नाले के लिए पानी शोधित करने के लिए 40 एमएलडी का एसटीपी बनाने का प्रोजेक्ट तैयार हो गया है। राज्य स्तरीय तकनीकी समिति की मंजूरी के बाद छह महीने में काम शुरू हो जाएगा।I
I- अतहर कादरी, प्रोजेक्ट मैनेजर जल निगम नगरीयI