मुफ्ती जहांगीर आलम और उमर गौतम
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एटीएस की रिमांड पर आए धर्मांतरण का गिरोह चलाने वाले उमर गौतम व जहांगीर आलम ने अपने कारनामों के राज उगलने शुरू कर दिए हैं। जांच एजेंसी ने पाया है कि उमर की संस्था इस्लामिक दावा सेंटर की मदद से लखनऊ की दो लड़कियों का धर्मांतरण कराया गया था। इनकी पहचान अलीगंज की फातिमा फारूख व तेलीबाग क्षेत्र की कनीज फातिमा के रूप में हुई। हालांकि, एटीएस उमर की हर जानकारी को सत्यापित करने के बाद कार्रवाई की बात कही है।
वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल दो वीडियो में उमर दावा कर रहा है कि वह 18 बार इंग्लैंड, चार बार अमेरिका और कई देशों की यात्राएं कर चुका है। कहा रहा है कि वह कैसे मुस्लिम बना अगर इतिहास बताएगा तो तीन चार घंटे लग जाएंगे। एक वीडियो में कह रहा है कि इस्लामिक दावा सेंटर ने एक हजार से अधिक लोगों के लीगल डॉक्यूमेंट तैयार कराए हैं। वीडियो में कानपुर की छत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी की परास्नातक की छात्रा सुप्रिया को तीन साल पहले आयशा बनाने और गोरखपुर के एक व्यक्ति के इस्लाम कुबूलने का जिक्र है। उमर ने एक समाचार पत्र में विज्ञापन देने की बात कही है। इसमें कहा गया है कि सेंटर ऐसे लोगों की मदद करता है जिन्होंने दीन कुबूल किया है। सेंटर में पोलैंड, पुर्तगाल, जर्मनी, सिंगापुर, अमेरिका और इंग्लैंड से आकर लोगों ने कानूनी सहायता ली है।
फंडिंग के बारे में भी की पूछताछ
सूत्रों का कहना है कि एटीएस ने आरोपियों से सेंटर को मिलने वाली फंडिंग के बारे में भी पूछताछ की है। उमर ने कई अलग-अलग जगहों से चंदे के रूप में पैसे आने की बात कुबूल की है। खातों की डिटेल एटीएस ने बैंकों से भी मांगी है। पैसे आईएसआई की ओर से भेजे गए या नहीं इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
केंद्रीय एजेंसियां भी कर रही हैं पूछताछ
उधर, उमर और जहांगीर आलम से पूछताछ के लिए केंद्रीय एजेंसियां भी एटीएस मुख्यालय पहुंच गई हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों को जल्द दिल्ली और नोएडा ले जाकर मौके पर तलाशी ली जाएगी जिसमें धर्मांतरण से जुड़े और दस्तावेज मिल सकते हैं।