लखनऊ। मुख्यमंत्री का सचिव, संयुक्त सचिव व समीक्षा अधिकारी बताकर नौकरी के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाले दो जालसाजों को यूपी एसटीएफ ने बुधवार ठाकुरगंज इलाके से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने नौकरी व काम करने के नाम पर कई लोगों से ठगी की है।
ठाकुरगंज के बरौरा में रहने वाले नरेंद्र वर्मा के मुताबिक कुछ महीने पहले उनकी मुलाकात मान सिंह उर्फ विकास से हुई थी, जिसने खुद को समीक्षा अधिकारी बताया था। बातों ही बातों में नरेंद्र ने मान सिंह से उनकी जमीन पर कुछ लोगों का कब्जा होने की बात कही। इस पर आरोपी ने झांसा दिया कि उसका दोस्त प्रदीप दुबे है, जो मुख्यमंत्री का संयुक्त सचिव है। वह 50 लाख रुपये में जमीन से कब्जा हटवा देगा। पीड़ित ने प्रदीप के खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। कुछ दिन बाद मान सिंह ने नरेंद्र की मुलाकात प्रदीप से कराई।
प्रदीप ने उनसे कहा, कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट लखनऊ में नर्सिंग व राजभवन में चतुर्थ श्रेणी की भर्ती निकली है। ठग ने पीड़ित से भांजे अनुज व बहू पूजा की नौकरी के लिए 40 लाख दिए। दूसरे भांजे की नौकरी के लिए 15 लाख रुपये दिए थे। मगर, न तो नौकरी मिली और न जमीन से कब्जा हटा। रकम मांगने पर मान सिंह ने व्हाट्सएप पर जमीन खाली करने का डीएम लखनऊ, एसडीएम व मानवाधिकार आयोग का आदेश भेज दिया। जांच की तो पता चला कि आदेश फर्जी था।
नरेंद्र ने ठाकुरगंज थाने में केस दर्ज कराया था। यूपी एसटीएफ ने बुधवार को गऊघाट रोड, पीपा पुल के पास आशियाना निवासी प्रदीप दुबे व दुबग्गा निवासी मान सिंह को गिरफ्तार किया। आरोपी प्रदीप मूल रूप से जौनपुर के मुगराबाद शाहपुर उकनी व मान सिंह संभल के सानी का रहने वाला है। दोनों के पास से दो लग्जरी कार, आधार कार्ड, तीन मोबाइल व डीएल बरामद किया है। पूछताछ में आरोपी प्रदीप ने बताया कि वह मान सिंह के साथ मिलकर खुद को मुख्यमंत्री का सचिव, संयुक्त सचिव बताकर युवकों से नौकरी लगवाने के एवज में ठगी करते थे। एसटीएफ ने दोनों को ठाकुरगंज पुलिस को सौंप दिया है।