रायबरेली। जिले में कड़ाके की ठंड हृदय व फेफड़े के रोगियों के लिए आफत बन गई है। जिला अस्पताल में हॉर्टअटैक से दो और सीने में दर्द होने से एक मरीज की मौत हो गई। मंगलवार को हृदय रोग, बुखार आदि बीमारियोंं के 10 से अधिक मरीज भर्ती कराए गए। हृदय रोग विभाग की ओपीडी में दोपहर ढाई बजे तक मरीजों ने चिकित्सीय सलाह ली।
जिले में ठंड बढ़ने के बाद हृदय और सांस की बीमारी के साथ ही जुकाम-बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। दिल में दिक्कत होने पर जिला अस्पताल में बीती 25 दिसंबर को गंगागंज निवासी अशर्फीलाल (60) और राना नगर निवासी प्रमोदिनी (53) को भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान ही दोनों मरीजों की मौत हो गई। सांस लेने में दिक्कत के साथ सीने में दर्द होने पर शिवगढ़ क्षेत्र के राजापुर की कलावती (63) को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मंगलवार को तड़के महिला की मौत हो गई।
मंगलवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे सलोन क्षेत्र के धरई निवासी बैजनाथ (62) को भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। सीने में दर्द होने के बाद मरीज को जिला अस्पताल लाया गया। बुखार की समस्या होने पर खीरों निवासी राकेश (40), प्रगतिपुरम निवासी माधुरी (65), डलमऊ निवासी रवि (2), लालगंज निवासी विकास (2), अमावां निवासी सूरजकला (48) को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घोसियाना निवासी स्वेता व जोहवाशर्की निवासी पुष्पा के नवजात को भी भर्ती कराया गया है। उधर, जिला अस्पताल की ओपीडी में सुबह ठंड अधिक होने के बाद भी मरीजों की लंबी लाइन रही। खासकर हृदय रोग विभाग में दो बजे के बाद भी मरीजों की भीड़ रही।
हॉर्टअटैक के लक्षण दिखें तो डॉक्टर से लें परामर्श : डॉ. सलीम
जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सलीम का कहना है कि ठंड बढ़ने के बाद हृदय और फेफड़े के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। सीने में दर्द, बेचैनी, पसीना आना, जबड़े, गर्दन बाजू व कंधे में दर्द, सांस का टूटना आदि हार्टअटैक के प्रमुख लक्षण हैं। ठंड के मौसम में नसें सिकुड़ती हैं और सख्त हो जाती हैं। ऐसे में दबाव बढ़ने से हार्टअटैक हो सकता है। ठंड से बचना और अपनी आदतों में सुधार लाना जरूरी है। लक्षण प्रतीत हो तो चिकित्सीय सलाह तुरंत लेना जरूरी है।
ठंड बढ़ी है। लोग एहतियात बरतें। थोड़ी भी समस्या होने पर मरीज को तुरत अस्पताल पहुंचाएं। हॉर्ट के साथ ही अन्य रोगियों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है। इमरजेंसी व वार्डों में इलाज के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं।
डॉ. महेंद्र मौर्या, सीएमएस जिला अस्पताल