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केजीएमयू में नेफ्रोलॉजी व इंडोक्राइनोलॉजी विभाग बंद, कई अन्य पर संकट

Thu, 25 Jul 2019 05:24 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू में नेफ्रोलॉजी और इंडोक्राइनोलॉजी की सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं बंद हैं। इसके अलावा कई अन्य विभागों में संकाय सदस्यों (सीनियर डॉक्टर) की संख्या कम हो गई है। यहां संकाय सदस्य बढ़ने के बजाय लगातार इस्तीफे दे रहे हैं। 200 से ज्यादा पद खाली बताए जा रहे हैं। इससे मरीजों के इलाज के साथ शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

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एशिया के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान होने का दावा करने वाले केजीएमयू के हालात खराब होते जा रहे हैं। अभी तक यहां सिर्फ मेडिकल और डेंटल संकाय था। पिछले साल से नर्सिंग एवं पैरामेडिकल संकाय भी चल रहा है। यहां साढ़े पांच सौ से ज्यादा संकाय सदस्य हैं। 4400 बेड हैं। करीब आठ से 10 हजार मरीजों की ओपीडी होती है। करीब 85 विभाग हैं।

केजीएमयू में सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं बढ़ाने की कवायद फीकी पड़ती जा रही है। कारण यहां की अव्यवस्था हो या राजधानी में खुलने वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की चकाचौंध, संकाय सदस्य लगातार केजीएमयू को अलविदा कह रहे हैं।
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न्यूरो सर्जरी में चार माह की वेटिंग
न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह ने मंगलवार को इस्तीफा दिया है। उनके जाते ही मरीजों की सांसत बढ़ गई है। इस विभाग में ऑपरेशन के लिए चार से पांच माह की वेटिंग चल रही है। यहां अब सात संकाय सदस्य (वरिष्ठ डॉक्टर), 12 सीनियर व पांच जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ही हैं। इस विभाग पर मरीजों का इसलिए भी दबाव रहता है कि ट्रॉमा सेंटर में तमाम मरीज न्यूरो सर्जरी से संबंधित आते हैं।

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लड़खड़ा रहा सीटीवीएस विभाग

सीटीवीएस विभाग में ऑपरेशन के लिए दो सौ मरीजों की वेटिंग चल रही है। यहां 40 बेड हैं। कुल सात संकाय सदस्य थे। जनवरी में प्रोफेसर शैलेंद्र यादव को सर्जरी विभाग भेज दिया गया है। इसके अलावा डॉ. शेखर टंडन पहले निलंबित रहे और फिर हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विवेक कुमार दो साल के प्रशिक्षण अवकाश पर चल रहे हैं। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजयंत 14 मार्च को इस्तीफा दे चुके हैं। अब यहां विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एके सिंह के साथ डॉ. सर्वेश कुमार और डॉ. अंबरीश कुमार बचे हैं।

विभाग में रोज 100 से 150 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। दो से तीन की दिल की सर्जरी हो रही है। करीब दो सौ की वेटिंग चल रही है। इस विभाग में हार्ट सर्जरी, वॉल्व प्रत्यारोपण सहित कई तरह के ऑपरेशन होते हैं। संकाय सदस्यों के जाने के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
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