लखनऊ। चिनहट में इंडियन ओवरसीज बैंक का लॉकर काटकर करोड़ों के जेवर पार करने के मामले में कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। लाइन हाजिर किए गए 13 पुलिसकर्मियों को दो दिन की मोहलत दी गई है। शनिवार और रविवार को सभी पुलिसकर्मी जांच अधिकारी एडीसीपी पूर्वी पंकज सिंह के समक्ष बयान दर्ज कराएंगे। एडीसीपी के मुताबिक सभी को तीन दिन के भीतर बयान देने के लिए कहा गया था। हालांकि, शुक्रवार को कोई भी नहीं आया।
उधर, बैंक की ओर से मामले के विवेचक इंस्पेक्टर गोमतीनगर राजेश त्रिपाठी को जेवर, सोना और नकदी की सूची सौंपी गई। सूत्रों का कहना है कि बैंक ने करीब 12 करोड़ रुपये के जेवर की सूची पुलिस को सौंपी है। इंस्पेक्टर का कहना है कि बैंक के अधिकारी आए थे। बैंक से चोरी हुए जेवर और सोना की सूची बैंक कर्मियों ने बनाई है। बैंक प्रबंधन की ओर से सूची दी जा रही थी, लेकिन उन्हें सॉफ्ट कॉपी देने के लिए कहा गया है।
अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में
इस पूरे प्रकरण में पूर्वी जोन के अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। मामले के पर्यवेक्षक की लापरवाही भी सामने आई है। वरिष्ठ अफसरों ने इस घटना को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। डीसीपी पूर्वी का कहना है कि उन्होंने लंबे समय से तैनात होने के कारण पुलिसकर्मियों को स्थानांतरित किया है। हालांकि अगले ही दिन सभी को लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके पीछे का कारण कोई स्पष्ट नहीं कर रहा है।
दबिश पर गए चार पुलिसकर्मियों पर नजर
चोरी के आरोपी को पकड़ने दबिश पर गाजीपुर जिले में गए दरोगा सतीश कुमार, सिपाही अजय कुमार, मनोज कुमार सिंह और हितेश सिंह पर अफसरों की नजर है। इनमें तीन सोना बरामदगी के अगले दिन छुट्टी पर चले गए थे। सूत्रों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि पुलिसकर्मी छुट्टी के बाद कहां गए थे। तीनों से अलग-लग पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही पता चलेगा कि कुल कितना सोना बरामद किया गया था।
मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू
आरोपी सोविंद मुठभेड़ में मारा गया था। इस मामले में डीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। नगर मजिस्ट्रेट ज्ञान चंद्र गुप्ता को जांच सौंपी गई है। मजिस्ट्रेट ने इसकी जांच भी शुरू कर दी है। मुठभेड़ के संबंध में जिस व्यक्ति को जो जानकारी हो वह 15 दिन के भीतर अपना बयान दर्ज करा सकता है। संबंधित व्यक्ति कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर 21 में उपस्थित होकर अपना बात रख सकता है।